
एक्सपायरी डेट में हेर फेर की भी आशंका
एक अनुमान के मुताबिक तकरीबन पांच फीसदी सिलेंडर एक्सपायर्ड या एक्सपायरी डेट के करीब होते हैं। लोगो के बीच जागरुकता कम होने की वजह से ये बार बार रोटेट होते रहते हैं। सामान्यत: एक्सपायरी डेट औसतन छह से आठ महीने एडवांस रखी जाती है। चूंकि एक्सपायरी डेट पेंट द्वारा प्रिंट की जाती है, इसलिए इसमें हेर-फेर की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता। कई बार जर्जर हालत में जंग लगे सिलेंडर पर भी एक्सपायरी डेट डेढ़-दो साल आगे की होती है। जिसपर एजेंसी वाले तर्क देते हैं कि यहां से वहां लाते ले जाते वक्त उठा-पटक से कुछ सिलेंडर पुराने दिखते हैं।
एक्सपायर सिलेंडर मिलने पर लें एक्शन
एक्सपायर्ड सिलेंडर मिलने पर उपभोक्ता एजेंसी को सूचना देकर सिलेंडर रिप्लेस करा सकता है। गैस एजेंसी के रिप्लेसमेंट से मना करने पर वह खाद्य या प्रशासनिक अधिकारी से शिकायत कर सकता है। इसे सेवा में भी कमी दिखने पर उपभोक्ता फोरम में मामला दायर किया जा सकता है।
अगली स्लाइड में समझिए बीमे का गणित...