Thursday, January 15, 2026
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Margashirsha Purnima Vrat Katha: मार्गशीर्ष पूर्णिमा की व्रत कथा, जिसे पढ़ने मात्र से ही सारे दुखों का हो जाएगा अंत

Margashirsha Purnima Vrat Katha 2025: आज 4 दिसंबर 2025 को मार्गशीर्ष महीने की पूर्णिमा है जिसे अगहन पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन कई लोग व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की विधि विधान पूजा करते हैं। यहां हम आपको बताएंगे मार्गशीर्ष पूर्णिमा की व्रत कथा क्या है।

Written By: Laveena Sharma @laveena1693
Published : Dec 04, 2025 07:08 am IST, Updated : Dec 04, 2025 07:08 am IST
purnima vrat katha- India TV Hindi
Image Source : CANVA मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत कथा

Margashirsha Purnima Vrat Katha 2025: मार्गशीर्ष पूर्णिमा साल की अंतिम पूर्णिमा है जो इस बार 4 दिसंबर को पड़ी है। इस दिन भगवान विष्णु-लक्ष्मी की अराधना की जाती है। कई श्रद्धालु इस पूर्णिमा के दिन व्रत भी रखते हैं। कहते हैं इस पूर्णिमा का व्रत रखने से मनुष्य की हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है। इस दिन स्नान-दान का विशेष महत्व माना गया है। कहते हैं इससे जन्म जन्मांतर के पापों से छुटकारा मिल जाता है। जो लोग इस दिन व्रत रखते हैं उन्हें इस पूर्णिमा की कथा जरूर पढ़नी चाहिए। चलिए आपको बताते हैं मार्गशीर्ष पूर्णिमा की पावन व्रत कथा।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत कथा

मार्गशीर्ष पूर्णिमा की कथा अनुसार प्राचीन काल में एक निर्धन ब्राह्मण रहता था, जिसकी भगवान में अटूट आस्था थी लेकिन वो गरीबी के कारण हमेशा परेशान रहता था। एक दिन वो अपनी किस्मत से दुखी होकर जंगल की ओर चल पड़ा। इसी दौरान उसे एक दिव्य ऋषि मिले, जिन्होंने उससे उसकी परेशानी का कारण पूछा। ब्राह्मण ने अपने कष्टों के बारे में बताया। ऋषि बोले, 'मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा को भगवान नारायण का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन जो व्यक्ति स्नान, दान, दीपदान और उपवास करता है उसके सभी प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं और उसके धन-धान्य की वृद्धि होती है। 

यदि तुम इस व्रत को पूरी आस्था के साथ विधि विधान रखते हो तो तुम्हारे जीवन के सभी अभाव दूर हो जाएंगे। ब्राह्मण ने ऋषि के कहने अनुसार इस व्रत का पालन किया। पूर्णिमा के दिन उसने पवित्र नदी में स्नान कर दीपदान किया और फिर ब्राह्मणों को अन्न और वस्त्र दान दिए और रात्रि भर जागरण किया। उसकी सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उसे वरदान दिया कि, ‘अब तुम्हारे जीवन में कभी धन की कमी नहीं होगी। सद्गुण और समृद्धि सदा तुम्हारे घर रहेगी।’ इस व्रत को करने से कुछ ही दिनों में उसका जीवन बदल गया और वह अत्यंत धनवान हो गया। कहते हैं तब से ही मार्गशीर्ष पूर्णिमा का व्रत मनोकामना-पूर्ति और समृद्धि प्रदान करने वाला माना जाता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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