
इतिहास गवाह है कि पिछले कुछ साल में टीम इंडिया के जिन तेज़ गेंदबाजों ने अपनी स्पीड कम की है उनकी कामयाबी का ग्राफ तेजी से नीचे आया है। वो चाहे इरफान पठान वो या फिर मुनाफ पटेल। हालत ये है कि आज ये गेंदबाज गुमनाम हो गए हैं।

ऐसे में अगर धोनी रफ्तार से समझौता करने की सलाह दे रहे हैं... तो ये भारतीय गेंदबाजों के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं।
पूर्व तेज़ गेंदबाज़ चेतन शर्मा का भी कहना है कि तेज़ गेंदबाज़ को अपनी स्पीड के साथ समझौता नहीं करना चाहिए।

रफ्तार भारतीय गेंदबाजों की ताकत नहीं रही है। लेकिन पिछले कुछ साल से उमेश यादव और वरुण एरॉन जैसे गेंदबाजों ने इस धारणा को बदल कर रख दिया है। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की पिचों पर इन गेंदबाजों का जलवा देखने को मिला है। ऐसे में धोनी के इस बयान ने एक नई बहस छेड़ दी है।