औरंगजेब की आखिरी ख्वाहिश क्या थी? जान लीजिए

औरंगजेब की आखिरी ख्वाहिश क्या थी? जान लीजिए

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मुगल बादशाह औरंगजेब की आखिरी ख्वाहिश थी कि मरने के बाद उन्हें खुल्दाबाद में ही दफनाया जाए।

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औरंगजेब अपने गुरु सूफी संत सैयद जैनुद्दीन को अपना पीर मानते थे।

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औरंगजेब ने अपनी वसीयत में लिखा था कि उनका मकबरा साधारण होना चाहिए।

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औरंगजेब की ख्वाहिश थी कि उनका मकबरा सब्जे (तुलसी) के पौधे से ढंका होना चाहिए।

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औरंगजेब की ख्वाहिश ये भी थी कि उनके मकबरे की छत नहीं होनी चाहिए।

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औरंगजेब का निधन 87 साल की उम्र में 1707 में अहमदनगर में हुआ था।

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औरंगजेब को औरंगाबाद से बहुत लगाव था। उन्होंने वहीं अपनी पत्नी की कब्र बीबी का मकबरा बनवाया था।

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औरंगजेब ने अपने जीवन के करीब 37 साल औरंगबाद में बिताए थे।

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औरंगाबाद से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित खुल्दाबाद में औरंगजेब को दफनाया गया था।

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