

भारत में सबसे ज्यादा भूकंप जम्मू-कश्मीर, गुजरात, और असम में आते हैं। इसके अलावा, उत्तर-पूर्वी भारत भी भूकंप से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र है। भारत को चार भूकंपीय क्षेत्रों में बांटा गया है। इन क्षेत्रों को जोन-2, जोन-3, जोन-4, और जोन-5 कहा जाता है। इनमें से जोन-5 सबसे ज्यादा सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र है, जबकि जोन-2 सबसे कम सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र है।
Image Source : PTIजोन-2 में तमिलनाडु, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, और हरियाणा शामिल हैं। इन राज्यों के अलग-अलग इलाकों में भूकंप का खतरा काफी कम है। इन जगहों पर अब तक कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है और प्लेटों की स्थिति के लिहाज से इसका खतरा कम है।
Image Source : Meta AIजोन-3 में केरल, बिहार, पंजाब, महाराष्ट्र, पश्चिमी राजस्थान, पूर्वी गुजरात, उत्तर प्रदेश, और मध्य प्रदेश का कुछ हिस्सा आता है। इन जगहों पर भूकंप का खतरा थोड़ा ज्यादा है। जोन-4 में मुंबई, दिल्ली जैसे महानगर, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पश्चिमी गुजरात, उत्तरांचल, उत्तर प्रदेश के पहाड़ी इलाके, बिहार-नेपाल सीमा के इलाके हैं।
Image Source : Meta AIजोन-5 में पूरा पूर्वोत्तर भारत आता है, इसमें जम्मू और कश्मीर के कुछ हिस्से, लद्दाख के कुछ हिस्से, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात में कच्छ का रण, उत्तर बिहार के कुछ हिस्से और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह शामिल हैं। यहां अक्सर छोटे-छोटे भूकंप आते रहते हैं, लेकिन तीव्रता कम होने के कारण नुकसान नहीं होता।
Image Source : Meta AIभारत में गुवाहाटी, श्रीनगर, दिल्ली, मुंबई, और चेन्नई में भूकंप का खतरा सबसे ज्यादा है। वहीं, मध्य भारत के शहरों में भूकंप का खतरा कम है। भारत में अब तक का सबसे विनाशकारी भूकंप 15 जनवरी, 1934 को बिहार में आया था।
Image Source : Meta AI26 जनवरी, 2001 को गुजरात के भुज में 7.7 तीव्रता का भूकंप आया था। इस भूकंप ने भी बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी। इसके अलावा 20 अक्टूबर, 1991 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में 6.8 तीव्रता का भूकंप आया था।
Image Source : Meta AIभारत में कश्मीर का क्षेत्र, पश्चिमी और मध्य हिमालय, उत्तर और मध्य बिहार, उत्तर-पूर्वी भारतीय क्षेत्र, कच्छ का रण, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को भूकंपीय क्षेत्र माना जाता है। इन जगहों पर ज्यादा भूकंप आते हैं।
Image Source : Meta AIऊंची इमारतें बनाने से पहले भूकंप जोनिंग मानचित्र का इस्तेमाल किया जाता है। जिन जगहों पर भूकंप का खतरा ज्यादा है। वहां, बड़ी इमारत नहीं बनाई जाती है। बड़ी इमारत बनाना जरूरी हो तो मकान की नींव रखते समय और दीवारें बनाते समय विशेष ध्यान रखना होता है।
Image Source : PTIजिन जगहों पर ज्यादा भूकंप आते हैं। वहां के लोग लकड़ी के घर बनाना पसंद करते हैं। भूकंप आने पर ये घर एक झटके में धराशायी नहीं होते हैं। अगर घर गिरता भी हो तो उसे दोबारा बनाने में कम समय और कम लागत लगती है।
Image Source : Meta AIलकड़ी के घरों का मलबा भी नहीं होता है। ऐसे में घर के अंदर मौजूद व्यक्ति भी भूकंप आने पर लकड़ी के घरों में ज्यादा सुरक्षित रहते हैं। भूंकप में अधिकतर मौतें लोगों के मलबे में दबने से ही होती हैं। लकड़ी का घर इसका डर कम करता है।
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