

पूरे देश में छठ महापर्व की धूम है। आज से इस चार दिवसीय पर्व की शुरुआत नहाय-खाय से हो रही है। यह एकमात्र ऐसा पर्व है, जिसमें प्रत्यक्ष रूप से भगवान सूर्य की पूजा की जाती है।
Image Source : unsplashछठ पूजा में मांगी गई मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मान्यता है कि अगर इस दौरान विशेष उपाय किए जाएं, तो संतान प्राप्ति जैसी मनोकामना भी पूर्ण हो सकती है।
Image Source : unsplashआज सुबह 6:00 से 8:00 बजे के बीच नहाय खाय का शुभ मुहूर्त है। इसके बाद 26 अक्टूबर को खरना और 28 अक्टूबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर महापर्व का समापन होगा।
Image Source : unsplashछठ पर्व में महिलाएं 36 घंटे का निर्जल व्रत रखती हैं। भगवान सूर्य को अर्घ्य देती हैं और संतान सुख व परिवार की मंगलकामना करती हैं।
Image Source : unsplashसंतान की इच्छा रखने वाली महिलाएं तीन दिनों तक विधि-विधान से पूजा करें। खरना के प्रसाद के बाद निर्जल व्रत रखें और अर्घ्य के समय सूर्य देव से संतान सुख की कामना करें।
Image Source : unsplashपहले अर्घ्य के दिन व्रती को छठ घाट तक दंडवत जाते हुए भगवान सूर्य से संतान सुख की प्रार्थना करनी चाहिए। इससे संतान प्राप्ति की संभावना बढ़ती है।
Image Source : unsplashसंध्या के समय डूबते सूर्य को तांबे के लोटे से अर्घ्य दें। अगले दिन उगते सूर्य को जल अर्पित करते हुए संतान प्राप्ति की मनोकामना करें।
Image Source : unsplashछठ पूजा के दिन महिलाओं को लाल कपड़े में गेहूं और गुड़ बांधकर गरीबों को दान करना चाहिए। इससे व्रती की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
Image Source : unsplashविश्वास है कि छठ माता की पूजा और भगवान सूर्य को अर्घ्य देने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। श्रद्धा और आस्था से किया गया यह व्रत फलदायी होता है।
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