देवराज इंद्र का वज्र या ब्रह्मास्त्र? जानिए कौन था रामायण और महाभारत का सबसे शक्तिशाली हथियार

देवराज इंद्र का वज्र या ब्रह्मास्त्र? जानिए कौन था रामायण और महाभारत का सबसे शक्तिशाली हथियार

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देवराज इंद्र का वज्र और ब्रह्मास्त्र ये दोनों ही पौराणिक काल के सबसे शक्तिशाली शस्त्रों में गिने जाते हैं।

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लेकिन अक्सर यह बहस छिड़ती है कि इन दोनों में से सबसे शक्तिशाली कौन था?

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वज्र का निर्माण महर्षि दधीचि की हड्डियों से हुआ था। कहते हैं इसका प्रहार कभी खाली नहीं जाता था। यह बिजली की गति से चलता है और शत्रु के रक्षा कवच तक को भेदने की ताकत रखता था।

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कहते हैं इंद्र ने इसी वज्र से वृत्रासुर का वध किया था। कहते हैं वृत्रासुर को वरदान प्राप्त था कि उसे कोई भी धातु या लकड़ी का हथियार नहीं मार सकता था।

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वहीं अगर अगर ब्रह्मास्त्र की बात करें तो ये शारीरिक बल से अधिक मानसिक और मंत्र की शक्ति पर आधारित था। जिसका ज्ञान कम ही योद्धाओं को था।

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इसकी तुलना आधुनिक परमाणु बमों से की जाती है। बल्कि ऐसा माना जाता है कि ये परमाणु बमों से भी ज्यादा विनाशकारी था।

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कहते हैं कि एक बार लक्ष्य निर्धारित होने पर ब्रह्मास्त्र उसे ढूंढकर नष्ट कर देता है और ये आने वाली पीढ़ियों और प्रकृति तक को नष्ट करने की ताकत रखता था।

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ब्रह्मास्त्र को रोक पाना हर किसी के बस की बात नहीं थी। इसे केवल एक दूसरा ब्रह्मास्त्र या उसे चलाने वाला ही रोक सकता था।

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यदि विनाश की क्षमता को देखें तो ब्रह्मास्त्र वज्र से कई गुना अधिक शक्तिशाली था। वज्र जो एक योद्धा को मार सकता है या फिर सेना को तितर-बितर कर सकता था लेकिन ब्रह्मास्त्र पूरे भूगोल को बदलने की क्षमता रखता था।

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