गुप्त नवरात्रि का नाम कैसे पड़ा, क्या है इसका महत्व? जानें

गुप्त नवरात्रि का नाम कैसे पड़ा, क्या है इसका महत्व? जानें

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गुप्त नवरात्रि साल में दो बार आती हैं। एक बार आषाढ़ माह में और एक बार माघ मास में

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30 जनवरी से 7 फरवरी 2025 तक माघ मास की गुप्त नवरात्रि है।

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गुप्त नवरात्रि को 'गुप्त' क्यों कहा जाता है और इसका क्या महत्व है, इसके बारे में आइए जानते हैं।

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गुप्त नवरात्रि के नाम के पीछे यह कारण है कि इस दौरान गुप्त विद्याओं की साधना की जाती है।

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गृहस्थ लोग इस दौरान पूजन नहीं करते बल्कि साधु-संत और तांत्रिक विद्याओं को पाने की इच्छा रखने वाले इस दौरान भगवती की साधना करते हैं।

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गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, बगलामुखी, धूमावती, मातंगी, कमला देवी, छिन्नमस्ता, और त्रिपुर भैरवी की पूजा की जाती है।

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गुप्त नवरात्रि में गृहस्थ लोग साधरण विधि से माता दुर्गा की पूजा कर सकते हैं।

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इस दौरान की गई पूजा से कुंडली के सभी दोष दूर होते हैं और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।

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इसके साथ ही धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति भी गुप्त नवरात्रि में पूजन करने से भक्तों को मिलती है।

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