

राम जी के परम भक्त हनुमान जी को अष्ट सिद्धायां और नव निधियां प्राप्त थीं। इन सिद्धियों और निधियों का वरदान माता सीता ने हनुमान जी को दिया था।
Image Source : Socialइनमें से कई सिद्धियों का प्रयोग हनुमान जी ने राम जी के कार्यों को पूरा करने के लिए किया था। ऐसे में आज हम भी आपको अष्ट सिद्धियों की जानकारी देंगे।
Image Source : Socialये अष्ट सिद्धियां हैं- अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व। आइए इनके प्रभाव और प्रयोग के बारे में जानते हैं।
Image Source : Socialअणिमा वह सिद्धि है जिसके चलते हनुमान जी अणु के जितना सूक्ष्म रूप रख पाते थें।
Image Source : Socialमहिमा नामक सिद्धि जिसको भी प्राप्त होती है वो किसी भी पल अपने शरीर को विशालकााय बना सकता है।
Image Source : Socialगरिमा नाम की सिद्धि के प्रभाव से हनुमान जी अपने शरीर के भार को हजारों गुना बढ़ा सकते थे।
Image Source : Socialलघिमा नाम की सिद्धि से शरीर को बहुत हल्का किया जा सकता है। वहीं प्राप्ति नामक सिद्धि से किसी भी चीज को प्राप्त किया जा सकता है।
Image Source : Socialप्राकाम्य सिद्धि आकाश की ऊंचाइयों को और पाताल की गहराइयों में रहने की शक्ति प्रदान करती है। इशित्व सिद्धि से दैवीय शक्तियां और वशित्व सिद्ध से मन को नियंत्रित करने की शक्ति हनुमान जी को प्राप्त हुई थी।
Image Source : Socialयह सारी सिद्धियां प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को कठिन तप और तपस्या करनी होती है।
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