खुदाई में मिली थी माता की मूर्ति, जानिए अरावली पर्वत पर बने मंदिर की कहानी

खुदाई में मिली थी माता की मूर्ति, जानिए अरावली पर्वत पर बने मंदिर की कहानी

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शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर 2025 से हो चुकी है, 2 अक्टूबर 2025 को विजयादशमी के साथ ही इस महापर्व की समाप्ति होगी।

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इन नौ दिनों में भक्तजन देवी की आराधना में लीन होते हैं और मां दुर्गा के प्रसिद्ध मंदिरों में दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं।

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आज हम आपको दिल्ली स्थित मां झंडेवालान मंदिर के दर्शन कराने जा रहे हैं, तो आप भी घर बैठे कीजिए झंडेवालान मंदिर के दर्शन।

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मां शक्ति को समर्पित ये मंदिर राजधानी दिल्ली में अरावली पर्वत की श्रृंखला पर स्थापित है। मंदिर की गुफा में 8 दशकों से अखंड ज्योत भी जल रही है।

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झंडेवालान देवी मंदिर अष्टकोणीय मंदिर है। मन्दिर का गुम्बद कमल के आकार का बना है, सबसे नीचे गुफा में माता की प्राचीन मूर्ति है।

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मां की यह प्राचीन मूर्ति उनके अनन्य भक्त बद्री दास को प्राप्त हुई थी। इसके ठीक पीछे एक शिवलिंग है, जो मूर्ति के साथ ही खुदायी में प्राप्त हुआ था।

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कहते हैं कि खुदाई में सबसे पहले झंडा मिला था। वहीं, ये भी प्रचलित है कि मंदिर शिखर पर बहुत बड़ा ध्वज लगाया गया, जो दूर से दिखाई देता था। इसीलिए माता को झंडेवाली कहा गया।

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दरअसल, खुदायी के समय माता की मूर्ति खंडित हो रही थी। अत: उसे उसी प्रकार छोड़ दिया गया। मूर्ति के नीचे का कुछ भाग आज भी उसी अवस्था में है।

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मुख्य भवन में मां झंडेवाली की सुंदर मूर्ति है। भवन के दक्षिण में शीतला मां, संतोषी मां, वैष्णो मां, गणेश-लक्ष्मी और हनुमान जी आदि देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं।

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