ज्येष्ठ अमावस्या पर पितरों को प्रसन्न करने के लिए किस मंत्र का जप करना चाहिए?

ज्येष्ठ अमावस्या पर पितरों को प्रसन्न करने के लिए किस मंत्र का जप करना चाहिए?

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ज्येष्ठ अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त तर्पण, दान आदि करना बेहद शुभ माना जाता है।

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अगर दान, तर्पण न भी कर पाएं तो मंत्र जप से भी आप पितरों का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

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ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 2025 में 26 मई को दोपहर 12 बजकर 14 मिनट से शुरू होकर 27 मई की सुबह 8 बजकर 34 मिनट तक रहेगी।

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ऐसे में पितरों को प्रसन्न करने के लिए आप दोनों ही दिन मंत्रों का जप कर सकते हैं। आइए अब जानते हैं पितरों को प्रसन्न करने वाले मंत्र के बारे में।

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पितरों को प्रसन्न करने के लिए सबसे सरल मंत्र है 'ॐ पितृ देवतायै नमः:' इस मंत्र का 108 बार जप करने से पितरों का आशीर्वाद आपको प्राप्त होगा।

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इसके साथ ही 'ॐ पितृ गणाय विद्महे जगतधारिणे धीमहि तन्नो पितृो प्रचोदयात्:' मंत्र का भी आप जप कर सकते हैं।

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अपने सभी भूले बिसरे पितरों की आत्मा की शांति के लिए 'ॐ श्री सर्व पितृ देवताभ्यो नमो नमः:' मंत्र का जप आपको ज्येष्ठ अमावस्या के दिन करना चाहिए।

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दक्षिण दिशा में दीपक जलाकर इनमें से किसी भी एक मंत्र का जप करने से आपको पितरों की कृपा प्राप्त होगी।

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ज्येष्ठ अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त मंत्र जप करने से पितृ दोष से आपको मुक्ति मिलती है और जीवन की कई बाधाओं का भी अंत होता है।

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