कैलाश मानसरोवर भारत से कब अलग हुआ? जानें

कैलाश मानसरोवर भारत से कब अलग हुआ? जानें

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कैलाश पर्वत हिंदू धर्म के साथ ही कई अन्य धर्मों के आस्था का केंद्र भी है। माना जाता है कि यहां भगवान शिव निवास करते हैं।

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हर साल कई भक्त कैलाश मानसरोवर की यात्रा करते हैं। पहले कैलाश मानसरोवर भारत का ही हिस्सा हुआ करता था लेकिन अब चीन में है।

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आइए ऐसे में जान लेते हैं की हिंदू धर्म का यह प्रमुख धार्मिक स्थल कब भारत से अलग हुआ था।

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तिब्बत पर 1912 से पहले तक चीन अपना दावा करता था लेकिन 13वें दलाई लामा ने तिब्बत को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया।

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1912 से 1950 के बाद तिब्बत पर चीन ने अपना दावा किया और 1951 में चीन के दबाव में आकर तिब्बत ने 17 सूत्री समझौते पर हस्ताक्षर किए।

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1951 में भारत और चीन के बीच एक समझौता हुआ जिसके तहत साल में एक बार भारत के लोग कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जा सकते थे। यह समझौता अभी तक जारी है।

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तिब्बत और कैलाश मानसरोवर भारत का हिस्सा कभी नहीं रहा, हालांकि जब तक तिब्बत एक अलग देश था तब तक कैलाश मानसरोवर की यात्रा आसान रही।

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अब बिना चीन की अनुमति के कैलाश मानसरोवर की यात्रा कर पाना संभव नहीं है। इसके लिए एक लंबी प्रक्रिया से भी भक्तों को गुजरना पड़ता है।

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साल 2025 में कैलाश मानसरोवर की यात्रा 30 जून से शुरू होगी। उत्तराखंड के पिथोरागढ़ से यात्री कैलाश मानसरोवर की ओर जाएंगे।

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