काली उपासना से दूर भागती है नकारात्मक ऊर्जा, अगहन अमावस्या काली पूजा के लिए क्यों जरूरी? जानें आध्यात्मिक रहस्य

काली उपासना से दूर भागती है नकारात्मक ऊर्जा, अगहन अमावस्या काली पूजा के लिए क्यों जरूरी? जानें आध्यात्मिक रहस्य

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मार्गशीर्ष अमावस्या को काली उपासना के लिए बेहद शक्तिशाली माना जाता है। इस रात की ऊर्जा साधना के लिए अनुकूल होती है और नकारात्मकता दूर करती है। जानिए क्यों अगहन मास की अमावस्या काली उपासना के लिए सर्वोत्तम मानी गई है और इस दिन कौन से उपाय लाभ देते हैं।

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मार्गशीर्ष अमावस्या साल की सबसे ऊर्जावान और प्रभावशाली रातों में से एक मानी जाती है। इस बार यह तिथि 19 नवंबर की सुबह शुरू होकर 20 नवंबर दोपहर तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार मुख्य पूजा 20 नवंबर को की जाएगी।

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अमावस्या की रात स्वभाव से शांत और ऊर्जा संवेदनशील मानी जाती है। जब यह तिथि मार्गशीर्ष मास में आती है, तो इसका आध्यात्मिक प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है।

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काली देवी की उपासना इस दिन किए जाने पर साधक को मानसिक शांति, नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती है।

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अमावस्या की रात वातावरण भारी होता है, जिससे तामसिक ऊर्जा सक्रिय हो जाती है। काली पूजा इस ऊर्जा को नियंत्रित कर सकारात्मक शक्ति में बदलने में सहायक होती है।

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काली उपासना भूत प्रेत बाधा, नजरदोष, डर और मानसिक बेचैनी से राहत देने के लिए अत्यंत प्रभावी मानी जाती है। इस दिन की साधना घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाती है।

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मां काली की साधना मन के डर और असुरक्षा को दूर करती है। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और निर्णय क्षमता मजबूत होती है।

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शाम को सरसों के तेल का दीप मां काली के सामने जलाएं, दीप जलाना शुभ माना जाता है। इसे घर की उत्तरपूर्व दिशा में रखने से नकारात्मकता कम होती है।

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क्रीं कालीकायै नमः मंत्र का 108 बार जाप भय और बाधाओं को दूर करता है। अग्नि में काले तिल अर्पित करना और पितरों के लिए दीपदान करने से घर का वातावरण शांत और सकारात्मक बनता है।

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