करवा चौथ के दिन छलनी से क्यों देखते हैं चांद?

करवा चौथ के दिन छलनी से क्यों देखते हैं चांद?

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इस साल करवा चौथ का त्योहार 10 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन चांद की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।

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लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि आखिर इस दिन चांद को छलनी से क्यों देखा जाता है।

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माना जाता है कि छलनी में हजारों छेद होते हैं। ऐसी में जब विवाहित महिला छलनी से चंद्रमा को देखती है तो छेदों की संख्या में चंद्रमा के जितने प्रतिबिंब दिखाई देते हैं उतनी ही पति की आयु बढ़ जाती है।

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इसलिए करवा चौथ के दिन निर्जला व्रत में चांद और पति के चेहरे को छलनी से देखने की प्रथा है, इसके बिना करवा चौथ का व्रत पूरा नहीं माना जाता।

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करवा चौथ पर चांद को छलनी से देखने की कथा चंद्र देव को मिले एक शाप से जुड़ी है।

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ऐसी मान्यता है कि भगवान गणेश ने चंद्र देव को श्राप दिया था कि जो भी भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को चांद के दर्शन करेगा उसे कलंक का सामना करना पड़ेगा।

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ऐसे में लोगों के मन में ये डर बन गया कि हर चौथ की रात के चंद्रमा को सीधी आंखों से नहीं देखना चाहिए इसलिए भी करवाचौथ पर छलनी की आड़ लेकर चंद्रमा के दर्शन किए जाते हैं।

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इस साल करवा चौथ का चांद रात 8 बजकर 13 मिनट पर दिखाई देगा।

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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