

महाकुंभ में अमृत स्नान (शाही स्नान) का प्रथम अधिकार नागा साधुओं का दिया गया है।
Image Source : FILE IMAGEनागा साधुओं को 'महायोद्धा साधु' भी कहा जाता है, क्योंकि प्राचीन काल में वे धर्म और समाज की रक्षा के लिए सेना के रूप में कार्य करते थे।
Image Source : FILE IMAGEमहाकुंभ मेला में नागा बाबाओं समेत कई महान साधु संत आते हैं। नागा साधु के दर्शन तो केवल महाकुंभ में ही मिल पाता है।
Image Source : FILE IMAGEऐसे में अधिकतर लोगों के मन में सवाल उठते हैं कि कुंभ के बाद आखिर नागा साधु कहां चले जाते हैं। तो आइए जानते हैं।
Image Source : FILE IMAGEबता दें कि नागा साधु अधिकांश अपने अखाड़ों के आश्रम और मंदिरों में रहते हैं।
Image Source : FILE IMAGEकुछ नागा साधु तपस्या के लिए हिमालय या ऊंचे पहाड़ों की गुफाओं में भी रहते हैं।
Image Source : FILE IMAGEअखाड़े के आदेशानुसार वे पैदल भ्रमण भी करते हैं और इस दौरान किसी गांव के मेढ़ पर झोपड़ी बनाकर धुनी रमाते हैं।
Image Source : FILE IMAGEनागा साधु अपने मठ, आश्रम और हिमालय की गुफाओं में रहते हैं और केवल कुंभ मेले में स्नान के दौरान ही वे सांसारिक दुनिया का दर्शन करते हैं।
Image Source : FILE IMAGEबता दें कि नागा साधु बनने के लिए 12 वर्ष का समय लगता है। न नए सदस्य केवल लंगोट पहनते हैं और कुंभ मेले में अंतिम प्रण लेने के बाद लंगोट त्याग देते हैं।
Image Source : FILE IMAGEनागा साधु भगवान शिव के उपासक होते हैं और उनका भोजन सात्विक रहता है। वे केवल फल, पत्तियां, जड़ी बूटी और कंदमूल खाते हैं।
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