कुंभ के बाद नागा साधु कहां चले जाते हैं? जानें

कुंभ के बाद नागा साधु कहां चले जाते हैं? जानें

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महाकुंभ में अमृत स्नान (शाही स्नान) का प्रथम अधिकार नागा साधुओं का दिया गया है।

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नागा साधुओं को 'महायोद्धा साधु' भी कहा जाता है, क्योंकि प्राचीन काल में वे धर्म और समाज की रक्षा के लिए सेना के रूप में कार्य करते थे।

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महाकुंभ मेला में नागा बाबाओं समेत कई महान साधु संत आते हैं। नागा साधु के दर्शन तो केवल महाकुंभ में ही मिल पाता है।

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ऐसे में अधिकतर लोगों के मन में सवाल उठते हैं कि कुंभ के बाद आखिर नागा साधु कहां चले जाते हैं। तो आइए जानते हैं।

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बता दें कि नागा साधु अधिकांश अपने अखाड़ों के आश्रम और मंदिरों में रहते हैं।

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कुछ नागा साधु तपस्या के लिए हिमालय या ऊंचे पहाड़ों की गुफाओं में भी रहते हैं।

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अखाड़े के आदेशानुसार वे पैदल भ्रमण भी करते हैं और इस दौरान किसी गांव के मेढ़ पर झोपड़ी बनाकर धुनी रमाते हैं।

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नागा साधु अपने मठ, आश्रम और हिमालय की गुफाओं में रहते हैं और केवल कुंभ मेले में स्नान के दौरान ही वे सांसारिक दुनिया का दर्शन करते हैं।

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बता दें कि नागा साधु बनने के लिए 12 वर्ष का समय लगता है। न नए सदस्य केवल लंगोट पहनते हैं और कुंभ मेले में अंतिम प्रण लेने के बाद लंगोट त्याग देते हैं।

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नागा साधु भगवान शिव के उपासक होते हैं और उनका भोजन सात्विक रहता है। वे केवल फल, पत्तियां, जड़ी बूटी और कंदमूल खाते हैं।

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