

महाकुंभ का मेला हर 12 वर्ष में एक बार लगता है। महाकुंभ के अलावा कुंभ और अर्धकुंभ का आयोजन भी धर्म स्थानों पर किया जाता है।
Image Source : Socialहर 3 साल में लगने वाले मेले को कुंभ, 6 वर्ष में लगने वाले मेले को अर्धकुंभ और 12 साल में लगने वाले मेले को महाकुंभ कहा जाता है।
Image Source : Socialऐसे में सवाल उठता है कि, आखिर क्यों महाकुंभ का मेला 12 सालों बाद ही लगता है। आइए इसका उत्तर जानते हैं।
Image Source : Social12 साल के बाद महाकुंभ के आयोजन की पहली वजह है बृहस्पति ग्रह की स्थिति। बृहस्पति एक साल में एक राशि बदलता है।
Image Source : Socialजब 12 साल के बाद बृहस्पति उसी राशि में आता है, जहां 12 वर्ष पहले था तो महाकुंभ का आयोजन किया जाता है।
Image Source : Socialमहाकुंभ 12 वर्ष के बाद मनाने के पीछे की एक वजह पौराणिक ग्रंथों में भी मिलती है। धार्मिक मत के अनुसार समुद्र मंथन के बाद देव और असुरों में युद्ध हुआ था।
Image Source : Socialदेवताओं के 12 दिन तक यह युद्ध चला था जो कि मनुष्यों के 12 साल के बराबर होते हैं।
Image Source : Socialइस कारण से भी 12 वर्षों के बाद कुंभ का आयोजन किया जाता है। 2025 में प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन हो रहा है।
Image Source : Socialमहाकुंभ का पहला शाही स्नान 2025 में 14 जनवरी को होगा और 26 जनवरी तक महाकुंभ का पवित्र मेला लगेगा।
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