

प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेले में नागा साधुओं के सभी अखाड़ों ने पहले अमृत स्नान में हिस्सा लिया।
Image Source : Socialसभी नागा साधु भले ही दिखने में एक जैसे लगते हों, लेकिन इनको भी अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाता है।
Image Source : Socialइनकी श्रेणियों को दीक्षा के स्थान के अनुसार नाम दिया जाता है। जैसे हरिद्वार के कुंभ में दीक्षा लेने वाले नागा साधुओं को बर्फानी नागा साधु कहते हैं।
Image Source : Socialइसी तरह प्रयाग में दीक्षा लेने वाले राज राजेश्वरी नागा साधु कहलाते हैं। उज्जैन में दीक्षा लेने वाले साधुओं को खूनी नागा साधु कहा जाता है।
Image Source : Socialवहीं जो साधु नासिक में दीक्षा लेते हैं उन्हें खिचड़ी या खिचड़िया नागा साधु कहा जाता है। इनका स्वभाव भी नाम के अनुसार ही होता है।
Image Source : Socialहरिद्वार में दीक्षा लेने वाले बर्फानी साधु बर्फ की तरह शीतल होते हैं।
Image Source : Socialउज्जैन में दीक्षा लेने वाले खूनी नागा साधु योद्धा की तरह उग्र और गंभीर होते हैं।
Image Source : Socialवहीं नासिक में दीक्षा लेने वाले खिचड़ी नागा साधु भी नाम की ही तरह मिलेजुले स्वभाव वाले होते हैं। ये कभी आपको उग्र दिखेंगे तो कभी बेहद शीतल।
Image Source : Socialआपको बता दें कि नागा साधु को दीक्षा कहां से मिलेगी इसका निर्धारण दीक्षा देने से पूर्व स्वभाव को देखकर किया जाता है।
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