महाकुंभ में नागा साधु ही क्यों करते हैं सबसे पहले स्नान? जानें

महाकुंभ में नागा साधु ही क्यों करते हैं सबसे पहले स्नान? जानें

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महाकुंभ 2025 का पहला शाही स्नान 14 जनवरी को होगा। इस दिन सबसे पहले नागा साधु शाही स्नान करेंगे।

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नागा साधुओं के सबसे पहले स्नान करने की परंपरा सदियों पुरानी है, लेकिन इसका कारण क्या है आज हम आपको बताएंगे।

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महाकुंभ के दौरान आम लोगों को नागा साधुओं के शाही स्नान के बाद ही त्रिवेणी घाट में स्नान करने की इजाजत दी जाएगी।

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माना जाता है कि नागा साधुओं को धर्म के प्रति उनकी निष्ठा को देखकर सम्मान स्वरूप उन्हें सबसे पहले शाही स्नान की अनुमति होती है।

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आदि शंकराचार्य के द्वारा इस परंपरा की शुरुआत हुई थी और आज तक भी ये परंपरा चली आ रही है।

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वहीं कुछ लोग मानते हैं कि मुगल काल के दौरान नागा साधुओं के प्रथम स्नान करने की रीति शुरू हुई थी।

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कुछ विद्वान मानते हैं कि साधु संन्यासियों का शरीर जप तप से सिद्ध हो चुका होता है, ऐसे में अगर वो पहले स्नान करते हैं तो नदी का जल और भी पवित्र हो जाता है।

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इसके बाद नदी के जल में आम लोग जब डुबकी लगाते हैं तो उन्हें भी पुण्य की प्राप्ति होती है।

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