

ब्रह्मास्त्र को सभी अस्त्रों का राजा माना जाता है। ये सर्वाधिक प्रसिद्ध दिव्यास्त्र था।
Image Source : freepikइस अस्त्र की रचना स्वयं परमपिता ब्रह्मा ने की थी और ये अमोघ अस्त्र था।
Image Source : freepikकिसी भी योद्धा के पास ब्रह्मास्त्र होना सम्मान की बात मानी जाती थी और ब्रह्मास्त्र का प्रतिकार केवल किसी अन्य ब्रह्मास्त्र से ही किया जा सकता था।
Image Source : freepikपुराणों में जिक्र है कि जब यह अस्त्र चलता था तो 10 हजार सूरज की गर्मी के बराबर आग निकलती थी। जिससे भयानक तबाही मचती थी।
Image Source : freepikइस अस्त्र को छोड़ने पर भयानक प्रलयाग्नि निकलती थी जो जीव-जंतु, वनस्पति और समस्त चर-अचर वस्तुओं का नाश कर देती थी।
Image Source : canvaवेदों में इन अस्त्र का उपयोग तब करने को कहा गया है, जब कोई चारा न बचे।
Image Source : canvaरामायण में भगवान राम, लक्ष्मण जी, रावण, मेघनाद, परशुराम और विश्वामित्र के पास ब्रह्मास्त्र था तो वहीं महाभारत में भीष्म, द्रोण, कर्ण, अश्वत्थामा और अर्जुन के पास ब्रह्मास्त्र था।
Image Source : freepikकहते हैं ब्रह्मास्त्र के चलने से भयानक तबाही मचती थी, पूरा पर्यावरण खत्म हो जाता था और जीवन या उससे जुड़े कोई स्रोत नहीं बचते थे।
Image Source : canva(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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