

प्रदोष व्रत को हिंदू धर्म में शिव साधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। हर माह कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है।
Image Source : Socialचैत्र शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 10 अप्रैल को है। इसी दिन प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। प्रदोष व्रत के दिन शाम की पूजा का बड़ा महत्व है।
Image Source : Socialप्रदोष का अर्थ ही होता है सूर्यास्त से कुछ पहले और कुछ बाद का समय। धार्मिक मतानुसार सूर्यास्त से 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद के समय को प्रदोष काल कहते हैं।
Image Source : Socialऐसे में आइए अब जान लेते हैं कि प्रदोष व्रत के दिन शाम के समय शिव आराधना क्यों करनी चाहिए।
Image Source : Socialमाना जाता है कि कि प्रदोष काल के दौरान ब्रह्मांडीय ऊर्जा सबसे अधिक सक्रिय रहती है।
Image Source : Socialऐसे में इस समय शिव भगवान की आराधना करने से भक्तों को उनके आशीर्वाद के साथ ही आध्यात्मिक उन्नति भी प्राप्त होती है।
Image Source : Socialशास्त्रों के अनुसार प्रदोष काल के दौरान शिव भगवान और पार्वती माता कैलाश पर्वत पर नृत्य करते हैं।
Image Source : Socialयानि शिव भगवान इस दौरान जागृत मुद्रा में होते हैं, इसलिए भी प्रदोष व्रत के दिन शाम के समय पूजा करने को कहा जाता है।
Image Source : Socialप्रदोष काल में शिव जी की पूजा करने से आपको उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है और साथ ही आपकी मनोकामनाओं को भी शिव भगवान पूरा करते हैं।
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