

आपने देखा होगा कि कोई भी धार्मिक या मांगलिक कार्यक्रम या पूजा के अंत में आरती की जाती है।
Image Source : Socialआपने जानने की कोशिश की है कि आखिरी पूजा-पाठ के अंत में ही आरती क्यों की जाती है?
Image Source : Socialअगर आपको पता नहीं है कि आखिर पूजा-पाठ के अंत में आरती क्यों होती है तो आइए जानते हैं।
Image Source : Socialआरती शब्द संस्कृत के आरात्रिक शब्द से निकला है जिसका अर्थ होता है अंधकार को मिटाना।
Image Source : Socialपूजा के अंत में आरती करने का अर्थ है ऊर्जा या प्रकाश का आवाहन करना। ताकि हमारे मन का अंधकार मिट सके।
Image Source : Socialआरती में प्रयोग होने वाली दीपक की लौ भक्ति, प्रकाश और आत्मज्ञान का प्रतीक मानी जाती है।
Image Source : Socialपूजा के दौरान जो भी चीजें हम प्रभु को अर्पित करते हैं आरती में अंतिम रूप से उसका समर्पण किया जाता है।
Image Source : Socialपूजा या धार्मिक आयोजन के दौरान जो दिव्य ऊर्जा निकलती है उसे आरती करके, घंटी बजाकर पूरे वातावरण में फैलाया जाता है ताकि पूरा वातावरण सकारात्मक हो जाए।
Image Source : Socialयह कुछ धार्मिक और आध्यात्मिक कारण है जिनके चलते पूजा या धार्मिक अनुष्ठान के अंत में आरती की जाती है।
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