पूजा-पाठ के अंत में ही क्यों की जाती है आरती? जानें कारण

पूजा-पाठ के अंत में ही क्यों की जाती है आरती? जानें कारण

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आपने देखा होगा कि कोई भी धार्मिक या मांगलिक कार्यक्रम या पूजा के अंत में आरती की जाती है।

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आपने जानने की कोशिश की है कि आखिरी पूजा-पाठ के अंत में ही आरती क्यों की जाती है?

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अगर आपको पता नहीं है कि आखिर पूजा-पाठ के अंत में आरती क्यों होती है तो आइए जानते हैं।

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आरती शब्द संस्कृत के आरात्रिक शब्द से निकला है जिसका अर्थ होता है अंधकार को मिटाना।

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पूजा के अंत में आरती करने का अर्थ है ऊर्जा या प्रकाश का आवाहन करना। ताकि हमारे मन का अंधकार मिट सके।

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आरती में प्रयोग होने वाली दीपक की लौ भक्ति, प्रकाश और आत्मज्ञान का प्रतीक मानी जाती है।

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पूजा के दौरान जो भी चीजें हम प्रभु को अर्पित करते हैं आरती में अंतिम रूप से उसका समर्पण किया जाता है।

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पूजा या धार्मिक आयोजन के दौरान जो दिव्य ऊर्जा निकलती है उसे आरती करके, घंटी बजाकर पूरे वातावरण में फैलाया जाता है ताकि पूरा वातावरण सकारात्मक हो जाए।

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यह कुछ धार्मिक और आध्यात्मिक कारण है जिनके चलते पूजा या धार्मिक अनुष्ठान के अंत में आरती की जाती है।

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