

भारत के झंडे में मौजूद तीन रंग केसरिया, सफेद और हरा क्रमश: शक्ति, शांति, उर्वरता के प्रतीक हैं।
Image Source : Socialवहीं ज्योतिष शास्त्र में भी हर रंग का अपना अलग अर्थ होता है।
Image Source : Socialऐसे में आज हम आपको ज्योतिषीय दृष्टि से बताएंगे कि तिरंगे के तीन रंगों का क्या अर्थ है।
Image Source : Socialज्योतिष में केसरिया सूर्य ग्रह का रंग है। सूर्य ग्रहों के राजा और आत्मविश्वास और ऊर्जा के कारक हैं। वहीं इस रंग को गुरु से भी जोड़कर देखा जाता है।
Image Source : Socialगुरु ग्रह संतुलन, समृद्धि और त्याग और धर्म का कारक है। इसलिए केसरिया रंग देश के हर व्यक्ति में ऊर्जा,संतुलन और त्याग को जगाने वाला ज्योतिषीय दृष्टि से कहा जा सकता है।
Image Source : Socialज्योतिष में सफेद रंग चंद्रमा और शुक्र से संबंधित है। चंद्र जहां शांति, सौम्यता का कारक है वहीं शुक्र सौंदर्य और कला का प्रतीक है।
Image Source : Socialज्योतिष के अनुसार, सफेद रंग देश में शांति, सौहार्द, सौंदर्य और रचनात्मकता देश के जनमानस में फैलाता है।
Image Source : Socialहरे रंग का संबंध बुध ग्रह से है जो तकनीक, कारोबार का कारक है। ज्योतिष के अनुसार यह रंग देश की संपन्नता और विकास को दर्शाता है।
Image Source : Socialवहीं अशोक चक्र का नीला रंग न्याय और मेहनत को दर्शाने वाला ज्योतिष के अनुसार माना जा है, क्योंकि नीला रंग शनि ग्रह से संबंधित है।
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