

कहते हैं शरीर चाहे कितना ही अपवित्र हो जाए लेकिन दाहिना कान कभी अपवित्र नहीं होता।
Image Source : canvaइसलिए भारतीय परंपरा में आज भी दायां कान छूकर शपथ लेना या मंत्र सुनना शुभ और पवित्र माना जाता है।
Image Source : canvaदायें कान पर देवताओं का वास माना जाता है इसलिए ये कभी अपवित्र नहीं होता।
Image Source : canvaशास्त्रों अनुसार दाहिने कान में वेद मंत्र डाला गया है जिससे ये जगह हमेशा पवित्र बनी रहती है।
Image Source : canvaकहते हैं शरीर की छोटी-छोटी अशुद्धियां दाहिना कान छू लेने से ही दूर हो जाती हैं।
Image Source : canvaपुराणों के अनुसार ऋषि-मुनि भी अपने शिष्यों के दाहिने कान में मंत्र या उपदेश फूंकते थे ताकि वे शुद्ध विचार और ज्ञान ग्रहण करें।
Image Source : canvaपराशर स्मृति में बताया गया है कि छींकने, थूकने, दांत के जूठे होने और मुंह से झूठी बात निकलने पर दाहिने कान का स्पर्श करना चाहिए। इससे मनुष्य की शुद्धि हो जाती है।
Image Source : canvaगुरु दीक्षा के समय गुप्त मंत्र दाहिने कान में ही बताते हैं क्योंकि यह बाएं कान की तुलना में अधिक पवित्र माना जाता है।
Image Source : canvaशौच के समय जनेऊ को दाहिने कान पर चढ़ाया जाता है ताकि वह अपवित्र न हो और देवताओं के संपर्क में रहे, जिससे उसकी शुद्धि बनी रहे।
Image Source : canvaNext : Rudraksh Se Jude Niyam: इस तरह का रुद्राक्ष कभी न पहनें, लाभ की जगह हो जाएगी हानि