

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र का पानी हमेशा खारा नहीं था। एक समय यह दूध जैसा सफेद और शहद जैसा मीठा माना जाता था। माता पार्वती के श्राप के कारण समुद्र का जल खारा हुआ। यह कथा समुद्र देव के अहंकार, मर्यादा भंग और देवी के क्रोध से जुड़ी है, जो आज भी धार्मिक मान्यताओं में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
Image Source : Pexlesहिंदू धर्मग्रंथों में बताया गया है कि प्राचीन काल में समुद्र का पानी मीठा और पीने योग्य हुआ करता था। यह आज जैसा खारा नहीं था। लेकिन देवी पार्वती के एक श्राप के कारण प्रकृति को भी अपना नियम बदलना पड़ गया।
Image Source : Pexelsहिंदू धर्म की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सतयुग में समुद्र देव का जल अत्यंत शुद्ध, पवित्र और मीठा हुआ करता था, जिसके कारण इस जल को अमृत समान माना जाता था।
Image Source : Pexelsसमुद्र देव को अपने मीठे जल और सौंदर्य पर अत्यधिक गर्व था। यही अहंकार आगे चलकर उनके पतन का कारण बना।
Image Source : Pexelsमाता पार्वती तप और साधना में लीन रहती थीं। भगवान शिव की अनुपस्थिति में वे एकांत में स्नान की तैयारी कर रही थीं। जिसके लिए देवी ने अपनी मर्यादा की रक्षा के लिए कुछ विशेष प्रबंध किए थे।
Image Source : Freepikमाता पार्वती के दिव्य रूप को देखकर समुद्र देव स्वयं को संयमित नहीं रख पाए, समुद्र देव देवी अद्भुत सौंदर्य और तेज से इतने सम्मोहित हो गए और मर्यादा की सीमा लांघने का प्रयास किया।
Image Source : Pexelsसमुद्र देव की कुदृष्टि से माता पार्वती अत्यंत क्रोधित हो गईं। यही उनके पतन का कारण बनी, उनके इस अमर्यादित व्यवहार के कारण मां उमा ने इसे खुद का ही नहीं, बल्कि पूरे स्त्री समाज की मर्यादा का अपमान माना।
Image Source : Pexelsमाता पार्वती ने कहा कि समुद्र देव का अहंकार उनके मीठे जल की वजह से ही बढ़ा है। क्रोध में आकर माता ने श्राप दिया कि समुद्र का समस्त जल अब खारा हो जाएगा और पीने योग्य नहीं रहेगा।
Image Source : Pexelsश्राप के बाद समुद्र का पानी हमेशा के लिए खारा हो गया। यही कारण है कि आज समुद्र के पास अथाह जल भंडार तो है, लेकिन यह धरती पर रहने वाले इंसानों समेत अन्य जीवित प्राणियों की प्यास नहीं बुझा सकता।
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