

विमान में प्रसव पीड़ा होना दुर्लभ ही है, मगर फिर भी कभी-कभार ऐसा हो जाता है। मगर, क्या आपको मालूम है कि, फ्लाइट में पैदा हुआ बच्चा किस देश का नागरिक होगा ?
Image Source : Pexelsयदि आपको इस सवाल का जवाब नहीं मालूम है तो आज हम आपको flight delayed.com के एक लेख के मुताबिक जवाब दे ही देते हैं।
Image Source : Pexelsसबसे पहले तो ये जान लें कि, आमतौर पर डॉक्टर संभावित स्वास्थ्य जोखिमों को देखते ही प्रेग्नेंसी के 36 हफ्तों तक फ्लाइट में सफर करने की सलाह नहीं देते हैं।
Image Source : Freepikदरअसल, फ्लाइट में पैदा होने वाले बच्चे की नागरिकता के नियम हर देश में अलग हैं। कुछ देशों, जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका में शिशु की नागरिकता उस क्षेत्रीय हवाई क्षेत्र पर निर्भर करती है जहां से वो उड़ान भर रहा था।
Image Source : Pexelsइस सिद्धांत को लैटिन में 'जस सोली' कहा जाता है जिसका अर्थ है 'भूमि का अधिकार।' उदाहरण के लिए, अमेरिकी क्षेत्र के ऊपर विमान में जन्मे बच्चे को स्वतः ही अमेरिकी नागरिकता मिल जाती है।
Image Source : Pexelsवहीं, यूनाइटेड किंगडम जैसे देश 'जस सैंगुइनिस' सिद्धांत का पालन करते हैं जिसका लैटिन अर्थ है 'रक्त का अधिकार।' इसका मतलब है कि बच्चे की नागरिकता उसके माता-पिता की नागरिकता से तय होती है।
Image Source : Pexelsयदि बच्चा किसी ऐसे क्षेत्र में पैदा हुआ है जिस पर किसी देश का दावा नहीं है, तो बर्थ सर्टिफिकट पर जन्मस्थान 'हवा में' लिखा जाएगा। इसी तरह, अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में जहाज पर जन्मे बच्चों के सर्टिफिकट पर 'समुद्र में'लिखा होता है।
Image Source : Pexelsवैसे कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि, ऐसे कुछ केसेज में बच्चे को माता-पिता दोनों की राष्ट्रीयता भी मिल सकती है। हालांकि, भारत जैसे कई देश ऐसे भी हैं जो दोहरी नागरिकता नहीं देते हैं।
Image Source : Pexelsडिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी वायरल रिपोर्ट्स और दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी दावे की पुष्टि नहीं करता है।
Image Source : PexelsNext : देश के इस रेलवे स्टेशन का नहीं है कोई नाम