चांद को मामा ही क्यों कहते हैं, फूफा या चाचा क्यों नहीं, आज जान लीजिए

चांद को मामा ही क्यों कहते हैं, फूफा या चाचा क्यों नहीं, आज जान लीजिए

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माना जाता है कि, शरद पूर्णिमा पर चांद की पूजा करने पर चंद्रमा की स्थिति काफी मजबूत होती है।

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बचपन से लेकर आज तक आपने चांद से जुड़ी कई बातें, रहस्य, कथा और कहानियां तो आप सुनी होंगी।

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मगर आज हम आपको चांद से जुड़ा एक ऐसा फैक्ट बताएंगे जिसको सुनने के बाद आप सोच में पड़ जाएंगे।

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क्या आपने कभी सोचा है कि, चांद को हमेशा चंदा 'मामा' ही क्यों कहा गया है ? चाचा, ताऊ, फूफा, जीजा या फिर और कुछ क्यों नहीं कहा गया ? हम बताते हैं।

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दरअसल, ऐसा माना जाता है ​कि जब समुद्र मंथन हो रहा था तो मां लक्ष्मी के बाद कई तत्व बाहर निकले जिसमें चन्द्रमा और कई चीजें थीं और उन चीजों माता का भाई या बहन माना गया।

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चूंकि हिन्दू मान्यताओं में श्री यानी लक्ष्मीजी को माता माना गया है इस हिसाब से चन्द्रमा उनके भाई कहलाए और माता का भाई हमेशा मामा माना ही जाता है। इस तरह चन्द्रमा चंदा मामा हो गए।

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पौराणिक कथाओं से इतर इसकी एक और वजह भी है जिसके बारे में हम आपको बता देते हैं।

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दरअसल, पृथ्वी भी लक्ष्मीजी की तरह मां कहलाती है और चन्द्रमा पृथ्वी के चारों ओर भाई की भांति चक्कर लगाता है। इसलिए भी इसे मामा कहते हैं।

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डिस्क्लेमर: ये इस खबर में किए दावे मान्यताओं और किंवदंतियों पर आधारित हैं इसलिए इंडिया टीवी इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी दावे को विचार में लाने से पहले आवश्यक जानकारों से परामर्श अवश्य लें।

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