सोमवार को राजधानी दिल्ली में चांदी की कीमत 3,00,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई, वहीं सोना 1.73 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के करीब जा पहुंचा।
फरवरी में सोने ने लगातार सातवें महीने लाभ दर्ज किया, जो 1973 के बाद से सबसे लंबी वृद्धि की सीरीज है। मौजूदा वैश्विक हालात में दोनों की कीमतों में तेजी का रुझान देखने को मिल सकता है।
भारत अपनी जरूरत के 90 प्रतिशत कच्चे तेल को दूसरे देशों से आयात करता है और इनमें से करीब आधा तेल खाड़ी देशों से ही आता है।
गोल्ड गुझिया का भाव 31 हजार रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। वहीं, सिल्वर गुझिया 21 हजार रुपये में एक किलो मिल रही है। सोने-चांदी के दाम बढ़ने पर भी गुझिया की मांग कम नहीं हुई है।
महंगाई, बढ़ती जरूरतें और आसान लोन की उपलब्धता ने देशभर में एक नया ट्रेंड खड़ा कर दिया है। अब लोग गहने बेच नहीं रहे, बल्कि गिरवी रखकर तुरंत नकदी जुटा रहे हैं। दिसंबर 2025 में देशभर में गोल्ड आभूषण गिरवी रखकर 24,061 करोड़ रुपये का लोन लिया गया।
ईरान दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल है। तनाव की स्थिति में सप्लाई चेन बाधित होने की चिंता के बीच कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जो भारत पर काफी बुरा असर डालेगा।
जानकार का कहना है कि कई फेडरल ओपन मार्केट कमेटी, सदस्यों के भाषणों पर भी नजर रहेगी, जो सोने के लिए नई गति प्रदान कर सकते हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के मुताबिक 20 फरवरी को खत्म हुए हफ्ते के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 2.119 अरब डॉलर बढ़कर 723.608 अरब डॉलर हो गया।
शुक्रवार को बीएसई पर ओला इलेक्ट्रिक के शेयर लगभग 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ 25.39 रुपये के भाव पर कारोबार कर रहे थे।
भारी गिरावट के बाद सोने-चांदी में आई यह तेजी निवेशकों के लिए राहत की खबर लेकर आई है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना मामूली बढ़त के साथ नए स्तर पर पहुंच गया, जबकि चांदी ने तो जोरदार उछाल दिखाकर बाजार का मूड ही बदल दिया।
सोना और चांदी सिर्फ पारंपरिक निवेश का प्रतीक नहीं रहे, बल्कि अब म्यूचुअल फंड और ETF के जरिए निवेशकों के पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में इनकी सही और पारदर्शी वैल्यू तय करना बेहद जरूरी है।
26 फरवरी यानी गुरुवार को दिल्ली और मुंबई समेत देश के प्रमुख शहरों में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। इसके पीछे वैश्विक बाजार में स्थिर रुख और निवेशकों का सुरक्षित एसेट्स की ओर रुख बदलना मुख्य कारण माना जा रहा है।
वैश्विक व्यापार तनाव और भू-राजनीतिक घटनाओं ने सोने को सपोर्ट दिया, लेकिन फेड की नीति स्थिर रहने के संकेतों ने तेजी को सीमित रखा।
अजय केडिया के मुताबिक, चांदी की कीमतों में कई वजहों से जोरदार तेजी आ सकती है। उन्होंने बताया कि सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल और इलेक्ट्रॉनिक्स की मैन्यूफैक्चरिंग में चांदी की जबरदस्त इंडस्ट्रियल डिमांड है।
सोमवार को MCX पर, 5 मार्च की डिलीवरी वाली चांदी का भाव 15,931 रुपये की तेजी के साथ 2,68,875 रुपये के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया था।
अमेरिका में उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद ट्रंप का वैश्विक आयात शुल्क बढ़ाना और बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों ने वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिससे निवेशक सुरक्षित निवेश सोना और चांदी की ओर बढ़े हैं।
सोने और चांदी की कीमत में आने वाले दिनों में काफी उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। चांदी ने तो इस साल नए रिकॉर्ड बनाने की झड़ी लगा दी है। कीमत 4 लाख रुपये के पार तक चली गई।
फरीदाबाद में एक स्क्रैप डीलर ने लगभग 15 लाख रुपये की सोने की ज्वेलरी से भरा एक पैकेट उसके असली मालिक को लौटा दिया, जब उसे यह घर के फेंके हुए सामान के बीच मिला, जिसे उसने कुछ महीने पहले खरीदा था।
शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव, लगातार बढ़ती महंगाई और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशक अब सुरक्षित निवेश के विकल्प ढूंढ रहे हैं। ऐसे समय में सोना और चांदी सिर्फ आभूषण नहीं रह गए हैं, बल्कि मजबूत निवेश साधन के रूप में सामने आए हैं।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अप्रैल 2026 डिलीवरी वाला सोना फ्यूचर्स दो दिनों में 5,000 रुपये से ज्यादा चढ़कर 1,55,761 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। वहीं मार्च 2026 सेटलमेंट वाली चांदी फ्यूचर्स में तो और भी तेज उछाल देखने को मिला।
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