Zakir Khan Shayari मैं शून्य पे सवार हूं...यहां पढ़ें युवाओं के चहेते जाकिर खान के 10 मशहूर शेर

Zakir Khan Shayari मैं शून्य पे सवार हूं...यहां पढ़ें युवाओं के चहेते जाकिर खान के 10 मशहूर शेर

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बे वजह बेवफाओं को याद किया है, ग़लत लोगों पे बहुत वक़्त बर्बाद किया है।

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कामयाबी हमने तेरे लिए खुद को यूं तैयार कर लिया, मैंने हर जज़्बात बाज़ार में रख कर इश्तेहार कर लिया।

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मैं शून्य पे सवार हूं बेअदब सा मैं खुमार हूं अब मुश्किलों से क्या डरूं मैं खुद कहर हज़ार हूं मैं शून्य पे सवार हूं

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इंतकाम सारे पूरे किए, पर इश्क अधूरा रहने दिया। बता देना सबको की, में मतलबी बड़ा था। हर बड़े मुकाम पे तन्हा ही मैं खड़ा था।

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हर एक दस्तूर से बेवफाई मैंने शिद्दत से हैं निभाई रास्ते भी खुद हैं ढूंढे और मंजिल भी खुद बनाई।

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तुम भी कमाल करते हों , उम्मीदें इंसान से लगा कर शिकवे भगवान से करते हो।

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मेरे दो चार ख्वाब हैं, जिन्हें में आसमां से दूर चाहता हूं.. चाहे जिंदगी गुमनाम रहे, मौत मैं मशहूर चाहता हूं

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हम दोनों में बस इतना सा फर्क है, उसके सब लेकिन मेरे नाम से शुरू होते है और मेरे सारे काश उस पर आ कर रुकते है।

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दिलों की बात करता है ज़माना, पर आज भी मोहब्बत चेहरे से ही शुरू होती हैं।

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