

ई-सिगरेट, जिसे आधिकारिक तौर पर इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम (ईएनडीएस) के नाम से जाना जाता है, एक बैटरी चालित उपकरण है जो तरल निकोटीन को वाष्पीकृत करके पारंपरिक सिगरेट की नकल करता है।
Image Source : FILEभारत में ई-सिगरेट को फ्लाइट के अन्दर ले जाना मना है। घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के साथ-साथ हवाई अड्डों पर भी ई-सिगरेट की अनुमति नहीं है।
Image Source : FILEई-सिगरेट जिसमें सभी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम (ईएनडीएस), हीट नॉट बर्न उत्पाद, ई-हुक्का और इस प्रकार के डिवाइस शामिल हैं, चाहे उन्हें किसी भी नाम से पुकारा जाए और उनका आकार, आकृति या फॉर्मेट कुछ भी हो, भारत में फ्लाइट में और एयरपोर्ट पर बैन हैं।
Image Source : FILEफ्लाइट के अंदर ई-सिगरेट को ले जाने पर प्रतिबंध के पीछे कई कारण हैं, लेकिन सबसे खास वजह उसमें पाई जाने वाली लिथियम आयन बैटरी।
Image Source : FILEई-सिगरेट में लगी लिथियम आयन बैटरी से आग लगने की संभावना हो सकती है, क्योंकि इसमें शॉर्ट सर्किट हो सकता है। यह फट सकती है।
Image Source : FILE2019 में, एयर चाइना की एक फ्लाइट को आपातकालीन लैंडिंग करानी पड़ी, क्योंकि पायलट के ई-सिगरेट के कारण गलत स्मोक अलार्म बज गया था।
Image Source : FILEई-सिगरेट विमान में लगे इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में हस्तक्षेप कर सकती है, इस कारण से भी इसे फ्लाइट के अन्दर लाना मना है।
Image Source : FILEई-सिगरेट अन्य यात्रियों के लिए असुविधाजनक हो सकती है, इसलिए भी इसे बैन किया गया है।
Image Source : FILEई-सिगरेट यात्रियों को अवांछित एरोसोल धुएं के संपर्क में ला सकती है, जो नुकसानदायक है। इस वजह से भी इसे बैन किया गया है।
Image Source : FILEभारत को छोड़ दुनिया के अधिकांश एयरलाइनों में ई-सिगरेट को हैंड बैगेज में ले जाने की अनुमति होती है, लेकिन होल्ड सामान में ले जाने की अनुमति नहीं होती।
Image Source : FILENext : पिछले हफ्ते ये म्यूचुअल फंड 7% तक लुढ़के, जानें किन स्कीम्स में निवेशकों की हुई कमाई