यजीदी समुदाय मुख्य रूप से इराक के उत्तरी हिस्से, विशेष रूप से नीनवे प्रांत में बसा हुआ है।

यजीदी समुदाय मुख्य रूप से इराक के उत्तरी हिस्से, विशेष रूप से नीनवे प्रांत में बसा हुआ है।

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यजीदियों का सबसे पवित्र और सबसे बड़ा मंदिर "लालेश" (Lalish) है, जो इराक के दुहोक प्रांत में स्थित है।

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लालेश मंदिर एक घाटी में स्थित है और चारों ओर पहाड़ियों से घिरा हुआ है।

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लालेश मंदिर को यजीदी धर्म का आध्यात्मिक केंद्र माना जाता है।

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यह मंदिर सफेद पत्थरों से बना हुआ शांतिपूर्ण और दिव्य स्थान है।

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हर यजीदी को जीवन में कम से कम एक बार लालेश की तीर्थयात्रा करनी जरूरी मानी जाती है।

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मंदिर में कई पवित्र स्थल हैं जहां तेल के दीपक जलाए जाते हैं और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।

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यजीदी मानते हैं कि आत्मा एक शरीर से दूसरे शरीर में प्रवेश करती है और अंत में मोक्ष पाती है। ये पुनर्जन्म में यकीन रखते हैं।

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यजीदियों का विश्वास है कि ईश्वर ने सृष्टि की रचना के बाद पहला प्रकाश यहीं भेजा था और यहीं पर यजीदियों के देवता "मलाक ताउस" (मोर देवता) ने अपना पहला कदम रखा था।

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लालेश मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि यजीदी पहचान और अस्तित्व का प्रतीक भी है।

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