Bihar Assembly Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव में प्रचार अपने चरम पर पहुंच चुका है। राज्य की 243 सीटों में से कुछ ऐसी सीटें हैं जिन पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं। ऐसी ही एक विधानसभा सीट है इमामगंज, जहां दूसरे चरण में 11 नवंबर को वोटिंग होगी। यह सीट गया जिले में आती है और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। 2020 में जीतन राम मांझी ने इस सीट से जीत हासिल की थी।
इन उम्मीदवारों के बीच मुकाबला
इस विधानसभा सीट से एनडीए के घटक दल हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा की दीपा मांझी चुनाव मैदान में हैं। दीपा, जीतन राम मांझी की बहू हैं। वहीं राष्ट्रीय जनता दल ने रितु प्रिया चौधरी को चुनाव मैदान में उतारा है। वहीं प्रशांत किशोर की जन सुराज से अजीत कुमार ताल ठोंक रहे हैं। ऐसे में इस सीट पर चुनावी मुकाबला दिलचस्प हो गया है। जन सुराज के चुनाव मैदान में आने से यहां मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।
HAM का गढ़ है इमामगंज विधानसभा सीट
यह सीट 2008 के परिसीमन के बाद से दलित वोट बैंक पर केंद्रित रही है। राजनीतिक रूप से इमामगंज विधानसभा सीट जीतन राम मांझी के हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM-Secular) का गढ़ मानी जाती है। मांझी का दल यहां दलितों, खासकर मांझी समुदाय, के बीच मजबूत पकड़ रखता है। इस विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति (SC)मुख्यत: मांझी वोट करीब 35 से 40 प्रतिशत के बीच है। वहीं ओबीसी खासतौर से यादव, कुशवाहा वोटों का प्रतिशत 25 से 30 के बीच है। सवर्ण वोट 15 से 20 प्रतिशत के बीच हैं जबकि मुस्लिम वोट 16 से 17 प्रतिशत के बीच है।
2020 का विधानसभा चुनाव परिणाम
2020 के विधानसभा चुनाव में हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के जीतन राम मांझी ने भारी जीत हासिल की थी। उन्हें 78,762 वोट मिले थे जबकि राष्ट्रीय जनता दल के उदय नारायण चौधरी को 62,728 वोट मिले थे। इस तरह से हार जीत का अंतर कुल 16,034 वोट का था। जब जीतन राम मांझी सांसद बने तो इमामगंज सीट पर उपचुनाव हुआ, जिसमें उनकी बहू दीपा मांझी ने जीत दर्ज की और 'हम' पार्टी का परचम बुलंद रखा।
2015 का विधानसभा चुनाव
2015 में पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने उदय नारायण चौधरी को हराकर चौधरी के लिए अजेय समझी जाने वाले इस सीट को अपने नाम कर लिया था। क्योंकि इससे पहले उदय नारायण चौधरी इस सीट से पांच बार चुनाव जीत चुके थे। लेकिन इस सिलसिले को जीतन राम मांझी ने तोड़ा और उदय नरायण चौधरी को करीब 30 हजार वोटों से हराया था। इसके बाद से इस सीट पर उनका ही दबदबा बना हुआ है।