1. Hindi News
  2. बिहार
  3. बिहार: बेटे को मृत मानकर परिवार ने कर दिया था अंतिम संस्कार, 18 साल बाद वो जिंदा वापस लौटा, हैरान कर देगा ये मामला

बिहार: बेटे को मृत मानकर परिवार ने कर दिया था अंतिम संस्कार, 18 साल बाद वो जिंदा वापस लौटा, हैरान कर देगा ये मामला

बिहार के मुजफ्फरपुर में एक परिवार ने जिस बेटे को मृत समझकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया था, वो 18 साल बाद जिंदा घर वापस लौट आया। उसे देखकर पूरा परिवार भावुक हो गया।

Muzaffarpur- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT 18 साल बाद जिंदा वापस लौटा बेटा

मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक परिवार ने जिस बेटे को मृत समझकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया था, वह करीब 18.5 साल के बाद जिंदा वापस लौटा। बेटे को जिंदा देखकर माता-पिता समेत पूरा परिवार दंग रह गया। मां की आंखों में बेटे के मिलने की खुशी साफ दिखाई दे रही थी। जिसने भी इस घटना को देखा, उसकी आंखों में खुशी के आंसू भर आए।

क्या है पूरा मामला?

बिहार के मुजफ्फरपुर से एक बेहद भावुक कर देने वाला मामला सामने आया। यहां 18 साल 5 महीने पहले लापता हुआ युवक अपने घर सकुशल लौट आया। जिस बेटे को परिवार ने वर्ष 2007 में मृत मानकर उसका अंतिम संस्कार तक कर दिया था, वही बेटा जब अचानक एक युवा के रूप में माता-पिता के सामने खड़ा हुआ तो मानो समय ठहर गया।

मुजफ्फरपुर जिले के गायघाट प्रखंड अंतर्गत लक्ष्मण नगर गांव, वार्ड संख्या-8 निवासी विश्वनाथ शाह और रामपरी देवी का छोटा पुत्र रौशन कुमार वर्ष 2007 में मैट्रिक परीक्षा के बाद अचानक गुमशुदा हो गया था। दरअसल गलत संगत में पड़कर वह दोस्तों के साथ दिल्ली जाने के लिए निकला, लेकिन रास्ते में ट्रेन में साथियों से बिछड़ गया। मंदबुद्धि होने के कारण वह घर वापस नहीं लौट सका।

परिवार ने बेटे का किया था प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार

परिजनों ने दिल्ली समेत कई स्थानों पर उसकी तलाश की, लेकिन महीनों तक कोई सुराग नहीं मिला। पिता उस समय सरकारी सेवा में थे और उन्होंने हर संभव प्रयास किया, लेकिन निराशा के बीच परिवार टूट गया। आखिर में समाज और परिस्थितियों के दबाव में परिवार ने रौशन को मृत मान लिया और उसका प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार कर दिया।

इधर, रौशन छपरा में इधर-उधर भटकता मिला। वहां सेवा कुटीर से जुड़े लोगों ने उसे अपने संरक्षण में लिया और भोजपुर के कोईलवर स्थित मानसिक चिकित्सालय में उसका इलाज कराया। इलाज के बाद काउंसलिंग के दौरान रौशन ने अपने पिता और गांव का नाम बताया। इसके बाद सेवा कुटीर, जिला प्रशासन और सामाजिक सुरक्षा कोषांग के अधिकारियों ने लंबी प्रक्रिया के तहत उसके परिजनों का पता लगाया।

28 दिसंबर को सामाजिक संगठन से सूचना मिलने के बाद पूरा परिवार छपरा पहुंचा। जैसे ही मां रामपरी देवी ने रौशन को देखा, उन्होंने तुरंत अपने बेटे को पहचान लिया। मां-बेटे के मिलन का वह क्षण इतना भावुक था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। 1 जनवरी को रौशन को उसके पैतृक गांव लाया गया।

बेटे को जीवित देखकर मां-पिता फूट-फूटकर रो पड़े। रामपरी देवी ने कहा कि वर्षों से जो उम्मीद दिल में दबी थी, वह आज पूरी हो गई। परिवार ने सेवा कुटीर सारण और जिला प्रशासन के प्रति गहरा आभार जताया। परिजनों ने बताया कि रौशन तीन भाइयों और दो बहनों में सबसे छोटा है। वर्तमान में उसका मानसिक संतुलन पूरी तरह ठीक नहीं है और परिवार अब उसके इलाज और देखभाल में जुट गया है। (इनपुट: मुजफ्फरपुर से संजीव कुमार)