सहरसा: बिहार के सहरसा से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया। यहां एक मछुआरे को कोशी नदी में डॉल्फिन मिली। इसके बाद मछुआरे ने उसे मार डाला और बोला कि इससे वह तेल निकालेगा। इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है।
डॉल्फिन मारने वाले की पहचान हुई
डॉल्फिन मारने वाले मछुआरे की पहचान सहरसा के डरहार गांव के निवासी विजेन्द्र के रूप में हुई है। विजेन्द्र नाव चलाता है और मछली पकड़ने का काम करता है। उसके मछली पकड़ने वाले जाल में डॉल्फिन फंस गई थी तो उसने मछली को मार दिया और उसे अपनी नाव पर लेकर जाने लगा।
जब उससे पूछा गया कि वह इसका क्या करेगा तो उसने बताया कि वह डॉल्फिन से तेल निकालेगा।
डॉल्फिन के बारे में जानिए
डॉल्फिन मुख्य रूप से समुद्रों और महासागरों में पाई जाती हैं। डॉल्फिन समुद्री स्तनधारी जीव है। ये अपनी बुद्धिमत्ता, सामाजिक व्यवहार और खेल-कूद की प्रवृत्ति के लिए प्रसिद्ध हैं। इसका शरीर चिकना और धारीदार होता है। ये पानी में तेज तैरने में माहिर होती है। इसके मुंह में तेज दांत होते हैं।
डॉल्फिन 9 मीटर या उससे अधिक लंबी हो सकती हैं। ये समूह में रहना पसंद करती हैं और एक-दूसरे की मदद करती हैं और खेलती हैं। इससे जुड़ी मुख्य प्रजातियां बॉटलनोज़ डॉल्फिन, कॉमन डॉल्फिन, स्पिनर डॉल्फिन
ऑर्का और रिवर डॉल्फिन हैं।
डॉल्फिन संरक्षण के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन इनकी कई प्रजातियां खतरे में है। जिसके मुख्य कारण जाल में फंसना, प्रदूषण (प्लास्टिक, रसायन), जहाजों से टक्कर, जलवायु परिवर्तन है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी कई प्रजातियां संरक्षित हैं। गंगा डॉल्फिन जैसी प्रजातियां भारत में विशेष रूप से संरक्षित हैं।
डॉल्फिन को मारने को लेकर भारत में क्या कानून है?
भारत में डॉल्फिन (खासकर गंगा डॉल्फिन) को मारना पूरी तरह गैर-कानूनी और गंभीर अपराध है। डॉल्फिन वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित हैं। गंगा डॉल्फिन को भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया था। डॉल्फिन संबंधी अपराध करने पर जेल और जुर्माना दोनों की सजा का प्रावधान है। डॉल्फिन से तेल निकालना, मांस खाना, या उसके शरीर के किसी हिस्से का उपयोग भी गैर-कानूनी है। (रिपोर्ट- संजीव कुमार)
बता दें कि यूपी के कानपुर में गंगा के किनारे एक 10 फीट लंबी डॉल्फिन मिली थी, जिसका वजन करीब 350 किलो था।
ये भी पढ़ें-
Explainer: व्हेल, डॉल्फिन और सील जैसे समुद्री जीवों की ताकत ही बन गई सबसे बड़ी कमजोरी, नए शोध में क्या पता चला