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रोहतास में बाढ़ का कहर, 50 घरों में घुसा पानी, रातभर फंसे रहे लोग, नाव से 100 लोगों को किया गया रेस्क्यू

सोन नदी के बढ़ते जलस्तर और इंद्रपुरी बैराज से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण रोहतास जिले के निचले और तटीय इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। करीब 100 लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है।

रोहतास में बाढ़ का कहर, 50 घरों में घुसा पानी, रातभर फंसे रहे लोग- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV रोहतास में बाढ़ का कहर, 50 घरों में घुसा पानी, रातभर फंसे रहे लोग

बिहार के रोहतास जिले में लगातार बारिश और सोन नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच बाढ़ का संकट गहरा होता जा रहा है। तिलौथू प्रखंड कार्यालय से सटे सरैयां गांव में बाढ़ का पानी रिहायशी इलाकों में घुस गया है जिससे लोग काफी प्रभावित हुए हैं। करीब 50 घर पानी से प्रभावित हैं, जबकि 30 से अधिक घर अब भी पानी में डूबे बताए जा रहे हैं। हालात इतने खराब हो गए कि कई परिवारों को रातभर अपने घरों में फंसे रहना पड़ा।

100 लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया
बुधवार सुबह स्थिति को देखते हुए उप प्रमुख जोखन पासवान और ग्रामीणों ने नाव की व्यवस्था कर करीब 100 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। रेस्क्यू किए गए लोगों में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे शामिल थे। कई ग्रामीण अपने पालतू जानवरों को भी साथ लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर निकले। अचानक घरों में पानी घुसने से लोगों के सामने जान बचाने के साथ-साथ जरूरी सामान सुरक्षित रखने की भी चुनौती खड़ी हो गई है। ग्रामीणों के मुताबिक, तुतला भवानी धाम की ओर से आने वाले पानी और सोन नदी में उफान के कारण सरैयां समेत आसपास के कई गांव जलमग्न हो गए हैं। सरैयां गांव में बाढ़ का असर सबसे अधिक बताया जा रहा है। घरों में पानी घुसने के बाद बड़ी संख्या में लोग अपना सामान छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाने को मजबूर हो गए हैं।

प्रशासन की मदद का इंतजार, ग्रामीणों में नाराजगी 
बाढ़ की गंभीर स्थिति के बीच ग्रामीणों ने प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्थिति बिगड़ने के बावजूद शाम तक कोई अधिकारी प्रभावित इलाके में पहुंचकर लोगों का हाल जानने नहीं आया। राहत और बचाव कार्य के लिए कई अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक सीओ, एसडीएम समेत अन्य अधिकारियों से बात नहीं हो सकी। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की ओर से केवल माइकिंग कराकर लोगों को सतर्क किया गया, जबकि प्रभावित परिवारों को तत्काल नाव, राहत सामग्री और सुरक्षित स्थान की जरूरत है। बाढ़ के पानी के साथ जहरीले सांप और अन्य जीव-जंतुओं के घरों में घुसने की आशंका ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है।

सरैयां से सटे फारूकगंज, शिवाला, मदारीपुर और तिलौथू पूर्वी समेत कई गांवों में भी पानी घुसने की सूचना है। खेतों में लगी धान की फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई है। लगातार बारिश और जलस्तर बढ़ने की आशंका के बीच सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे लोग भी भय के साये में हैं।

पुल टूटने से बढ़ी परेशानी, करीब एक हजार लोग प्रभावित 
बाढ़ के बीच सरैयां और तिलौथू के बीच आवागमन की समस्या भी गंभीर हो गई है। पुल निर्माण के लिए करीब चार माह पहले पुल तोड़े जाने के कारण दोनों गांवों का सीधा संपर्क पहले ही बाधित है। ग्रामीणों के अनुसार करीब एक हजार लोगों को तिलौथू बाजार पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। अब मुख्य सड़क के दोनों ओर बाढ़ का पानी भर जाने से आवागमन और मुश्किल हो गया है। आपात स्थिति में बीमार, बुजुर्ग और जरूरतमंद लोगों को बाहर निकालना भी चुनौती बन गया है।

वहीं ग्रामीणों ने बताया कि 2015 में भी बाढ़ के दौरान सरैयां के रिहायशी इलाके के साथ कोडर और मदारीपुर गांव प्रभावित हुए थे। इस बार फिर बाढ़ का पानी घरों तक पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल प्रभाव से नाव, राहत सामग्री, पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। इधर, बीडीओ अंकित जैन ने बताया कि वह फिलहाल बैठक में हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक स्तर से जो भी संभव होगा, किया जाएगा। फिलहाल सरैयां गांव में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन की ओर टिकी हैं कि प्रभावित परिवारों तक राहत और बचाव की सुविधाएं कब पहुंचती हैं।

(रिपोर्ट - RANJAN SINGH ROHTAS)