बिहार के हाजीपुर राघोपुर में हुए दर्दनाक नाव हादसे से पहले का एक लाइव वीडियो सामने आया है, महज 26 सेकेंड के इस वीडियो में नाव पर सवार बच्चे हंसते-बोलते नजर आ रहे हैं। नाव में पानी भरने को लेकर बच्चों की बातचीत और उनकी बेफिक्र हंसी अब हर किसी का कलेजा चीर रही है। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर बाद खुशियों से भरा यह सफर मातम में बदल जाएगा और 13 मासूमों की जिंदगी हमेशा के लिए खामोश हो जाएगी।
भोज खाने जा रहे थे बच्चे, रास्ते में काल बनी नाव
दरअसल, 13 अक्टूबर की शाम बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर थाना क्षेत्र के रामपुर श्यामचंद गांव में दर्दनाक नाव हादसा हुआ था। शाम करीब पौने आठ बजे गांव के ढाब के पार सिंगेश्वर राय के यहां भोज का आयोजन था। भोज खाने के लिए करीब 20 से 25 बच्चे छोटी नाव पर सवार होकर जा रहे थे। बताया गया कि नाव खुलने के कुछ दूर बाद ही डगमगाने लगी और देखते ही देखते पानी में डूब गई। नाव पर सवार बच्चे गहरे पानी में समा गए। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोग बच्चों को बचाने के लिए पानी में उतरे और उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की। बचाए गए बच्चों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां 13 बच्चों को मृत घोषित कर दिया गया।
वीडियो में सुनाई देने वाली हंसी हर किसी को झकझोर रही है
हादसे से पहले का यह 26 सेकेंड का वीडियो अब सिर्फ एक रिकॉर्डिंग नहीं, बल्कि उन मासूमों की जिंदगी के आखिरी पलों की याद बन गया है। वीडियो में सुनाई देने वाली हंसी और पानी भरने की बात हर किसी को झकझोर रही है। सवाल यह भी है कि नाव में पानी भरने और उसके डगमगाने के बावजूद बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम थे। इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वालों में निशु कुमारी (14), अंकिता कुमारी (14), अक्की कुमारी (10), अमृता कुमारी (7), नमन कुमार (8), अलीशा कुमारी (18), सिकी कुमारी (16), पीयूष कुमार (10), सोनम कुमारी (12), आर्यन कुमार (12), बंटी कुमार (8), सोनी कुमारी (17) और पिंकी कुमारी (15) शामिल हैं।
बच्चों की मौत परिवारों के लिए जिंदगी भर का दर्द बन गई
राघोपुर नाव हादसे से पहले का यह वीडियो एक बार फिर उस दर्दनाक घटना की याद दिला रहा है। कुछ सेकेंड पहले तक जो बच्चे हंस रहे थे, उनकी आवाजें अब उनके परिवारों के लिए जिंदगी भर का दर्द बन गई हैं। सवाल सिर्फ हादसे का नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों का भी है, जिनमें बच्चों को छोटी नाव से पानी पार करना पड़ा। आखिर ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए सुरक्षा के क्या इंतजाम होने चाहिए। यह सवाल अब भी कायम है।
हाजीपुर से राजा बाबू की रिपोर्ट
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