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सुपौल की वन देवी दुर्गा का अनोखा धाम, पिंडी स्वरूप में विराजती हैं मां, नवरात्र में उमड़ता है हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब

बिहार के सुपौल जिले में एक ऐसा धार्मिक स्थल है, जहां मां दुर्गा की पूजा पिंडी स्वरूप में की जाती है। नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल बना रहता है। मां के दर्शन के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से भी लोग पहुंचते हैं।

सुपौल वन देवी दुर्गा मंदिर- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV सुपौल वन देवी दुर्गा मंदिर

बिहार के सुपौल जिले में आस्था और पौराणिक मान्यताओं से जुड़ा एक ऐसा धार्मिक स्थल है,जहां मां दुर्गा की पूजा किसी भव्य प्रतिमा के बजाय पिंडी स्वरूप में की जाती है। जिला मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर हरदी स्थान स्थित वन देवी दुर्गा मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने यहां बेर के पेड़ के नीचे मां वन देवी की स्थापना कर उनकी पूजा-अर्चना की थी। इसी मान्यता के कारण यह स्थान आज भी लोगों की श्रद्धा और विश्वास से जुड़ा हुआ है।

बेर के पेड़ के नीचे शुरू हुई पूजा, अब बना भव्य मंदिर

स्थानीय लोगों के अनुसार,वर्षों पहले हरदी स्थान में बेर के एक पेड़ के नीचे मां वन देवी पिंडी स्वरूप में विराजमान थीं। मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने इसी स्थान पर मां की स्थापना कर पूजा की थी। इसके बाद से ही बेर के पेड़ के नीचे मां की आराधना की परंपरा चली आ रही है। समय बीतता गया, लेकिन मां के प्रति लोगों की आस्था कम नहीं हुई। धीरे-धीरे यह स्थान आसपास के गांवों के लोगों के बीच प्रसिद्ध होता चला गया।

श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था और धार्मिक महत्व को देखते हुए कुछ वर्ष पहले यहां एक भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया। मंदिर में मां वन देवी की पिंडी स्वरूप की स्थापना की गई, जहां अब श्रद्धालु नियमित रूप से पूजा-अर्चना करते हैं। हालांकि मंदिर में पूजा करने के साथ बेर के पेड़ के नीचे माथा टेकने और आराधना करने की परंपरा भी कायम है। यही विशेषता इस धार्मिक स्थल को एक अलग पहचान देती है।

दूर-दराज से पहुंचते हैं भक्त

श्रद्धालुओं का विश्वास है कि जो भी भक्त सच्चे मन और श्रद्धा से मां के दरबार में अपनी मुराद लेकर पहुंचता है, मां उसकी मनोकामना पूरी करती हैं। इसी विश्वास के साथ लोग परिवार की सुख-समृद्धि,खुशहाली और जीवन की परेशानियों से मुक्ति की कामना लेकर यहां आते हैं। मंदिर परिसर में पहुंचने वाले श्रद्धालु मां की पिंडी स्वरूप की पूजा करते हैं और इसके बाद बेर के पेड़ के नीचे भी माथा टेककर आशीर्वाद मांगते हैं। कई श्रद्धालुओं के लिए यह केवल पूजा का स्थान नहीं,बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही आस्था,परंपरा और विश्वास का प्रतीक है।

नवरात्र में उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब

वैसे तो वन देवी मंदिर में सालभर श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी रहता है, लेकिन शारदीय नवरात्र के दौरान यहां भक्तों की भीड़ काफी बढ़ जाती है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, सामान्य दिनों में जहां सैकड़ों श्रद्धालु मां के दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं, वहीं नवरात्र के अवसर पर हजारों की संख्या में भक्त यहां जुटते हैं।

आस्था,परंपरा और विश्वास का अनूठा संगम

हरदी स्थान का वन देवी दुर्गा मंदिर सुपौल की धार्मिक पहचान से जुड़ा एक महत्वपूर्ण स्थल है। बेर के पेड़ के नीचे पूजा की पुरानी परंपरा से लेकर आज के भव्य मंदिर तक का सफर इस स्थान के प्रति लोगों की अटूट श्रद्धा को दर्शाता है। पांडवों के अज्ञातवास से जुड़ी लोकमान्यता, मां के पिंडी स्वरूप की पूजा और नवरात्र में उमड़ने वाली भक्तों की भीड़ इस मंदिर को खास बनाती है।

यहां आने वाले श्रद्धालु मां के दरबार में शीश झुकाकर सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। हरदी स्थान की वन देवी के दरबार में आस्था की यह परंपरा आज भी कायम है। बेर के पेड़ के नीचे शुरू हुई पूजा अब भव्य मंदिर तक पहुंच चुकी है, लेकिन श्रद्धालुओं के मन में मां के प्रति विश्वास आज भी उतना ही गहरा है।

सुपौल से संत सरोज की रिपोर्ट 

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