पटना: बिहार में एक बार फिर चुनाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। यहां किसी भी समय विधानसभा चुनाव का ऐलान किया जा सकता है। बिहार में इस समय नीतीश कुमार सीएम हैं। बिहार की 243 सीटों पर इस बार चुनाव होना है, जिसके लिए सभी दल पूरी तैयारी से चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं। इस बार के चुनाव में कौन जीतेगा और किसे मुख्यमंत्री बनना होगा वह तो नतीजे सामने आने के बाद ही पता चलेगा। हालांकि बिहार की राजनीति कभी भी किसी करवट बैठ सकती है। बिहार की राजनीति से जुड़ी एक अहम घटना और भी है, जब एक ही साल में दो बार विधानसभा चुनाव करवाने पड़े थे।
किसी को नहीं मिला बहुमत
दरअसल, ये बात है साल 2005 की, जब बिहार में एक ही साल के अंदर दो-दो बार विधानसभा चुनाव करवाने पड़े थे। दोबारा चुनाव की वजह भी ऐसी थी, जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे। दरअसल, बिहार में फरवरी 2005 में विधानसभा चुनाव हुए थे। इस दौरान किसी भी दल को जनता ने पूर्ण बहुमत नहीं दिया था, जिसके बाद किसी भी दल की सरकार नहीं बन सकी और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा। इसके बाद अक्टूबर नवंबर में फिर से विधानसभा चुनाव करवाने पड़े, जिसमें जदयू सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और उसने भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई थी।
पहले चुनाव के नतीजे
बता दें कि साल 2005 में पहला चुनाव फरवरी में हुआ था। इस चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। इस चुनाव राजद ने 215 सीटों पर चुनाव लड़ा, जिसमें से उसे 75 सीटों पर जीत मिली। वहीं, जदयू ने 138 सीटों पर चुनाव लड़ा, जिसमें से 55 सीटों पर जीत हासिल की। इसके अलावा भाजपा ने 103 सीटों पर चुनाव लड़कर 37 सीटों पर जीत दर्ज की। इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने 84 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन सिर्फ 10 सीटें ही जीत सकी। इस चुनाव में बहुमत के लिए 122 सीटों का होना जरूरी था, जो किसी भी दल के पास नहीं था, जिस वजह से किसी भी पार्टी की सरकार नहीं बन सकी।
दूसरे चुनाव के नतीजे
फरवरी में चुनाव के नतीजे आने के बाद भी जब सरकार नहीं बन पाई तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। इसके बाद अक्टूबर-नवंबर में फिर से विधानसभा चुनाव कराए गए। दूसरी बार हुए विधानसभा चुनाव में जदयू ने 139 सीटों पर चुनाव लड़ा, जिसमें 88 सीटों पर उसे जीत मिली। इसके साथ ही जदयू राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। वहीं दूसरे स्थान पर भाजपा ने 102 सीटों पर चुनाव लड़कर 55 पर जीत दर्ज की। इसके अलावा राजद ने 175 सीटों पर चुनाव लड़कर 54 सीटें जीतीं थीं, जबकि कांग्रेस को 51 सीटों पर चुनाव लड़ने के बाद सिर्फ 9 सीटों पर ही जीत मिली। चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद जदयू और भाजपा ने संयुक्त रूप से सरकार बनाई और नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बने थे।