नई दिल्ली: कारगिल युद्ध के दौरान शहीद हुए सौरभ कालिया सहित पांच भारतीय जवानों को इंसाफ दिलाने के लिए सरकार ने अपना रुख बदल दिया है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि, अगर सुप्रीम कोर्ट से इजाजत मिली तो सरकार अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट जाएगी।
सरकार ने माना है कि शहीद कैप्टन सौरभ कालिया का मामला काफी अलग है इसलिए सरकार सुप्रीम कोर्ट को दिए अपने हलफनामे में बदलाव करेगी।
दरअसल, सोमवार को सरकार ने संसद में कहा था कि वो शहीद कैप्टन कालिया के मुद्दे पर अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट नहीं जाएगी। देश भर में इसका विरोध होने पर सरकार को अपने कदम वापस खींचने पड़े और खुद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पूरे मामले पर सफाई दी थी।
साथ ही इस मामले में पाकिस्तान के पूर्व सैनिक गुले खानदान ने खुलासा करते हुए बताया कि, सेना ने कैप्टन कालिया को गोली मारी थी और उनके साथियों के शव को गहरी जगह में डाला था।
सुषमा स्वराज ने पुराने समझौतों का हवाला देते हुए सरकार की मजबूरियां गिनाई और कहा कि कॉमनवेल्थ देशों का हिस्सा होने के कारण दोनों देशों में एक दूसरे के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट जाने का प्रावधान नहीं है।
इस मामले में सौरव कालिया ने पिता एन.के. कालिया ने साल 2012 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सरकारों के रवैये से निराश शहीद के इस पिता को अब सिर्फ सुप्रीम कोर्ट से इंसाफ की आस है।
इस मामले पर सियासत भी शुरु हो गई है। कांग्रेस ने पीएम मोदी समेत पूरी बीजेपी पर कथनी और करनी में फर्क होने का आरोप लगाया है।
कारगिल के शहीद कैप्टन सौरभ कालिया को 16 साल बाद भी इंसाफ मिल पाएगा या नहीं ये 25 अगस्त को तय होगा जब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होगी।
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