नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र से बहु ब्रांड खुदरा व ई-कामर्स क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का विरोध करने वाली व्यापारियों के संगठन की एक याचिका को ज्ञापन के रूप में लेते हुए उसपर विचार लेने को कहा है।
न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने कनफेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) से कहा कि वह एक नया ज्ञापन तैयार करें और इसे एक सप्ताह में केंद्र को भेजे। अदालत ने कहा कि याचिका से यह पता नहीं चलता है कि सरकार की एफडीआई नीति से वे कैसे प्रभावित होंगे। अदालत ने कहा कि कोई नीति बनाते समय सरकार को सभी अंशधारकों के विचार लेने चाहिए। ऐसे में यह उचित होगा कि कैट को भी अपनी बात रखने का मौका दिया जाए।
अदालत ने यह आदेश कैट की उस याचिका का निपटान करते हुए दिया जिसमें आरोप लगाया गया था कि बहु ब्रांड खुदरा क्षेत्र में 51 प्रतिशत एफडीआई की नीति सभी को समान अवसर नहीं उपलब्ध करा रही। केंद्र ने अदालत में दलील दी थी कि इस याचिका को अभिवेदन समझा जाए जैसा कि रिटेलर्स एसोसिएशन आफ इंडिया के मामले में ई-कामर्स साइटों के संदर्भ में किया गया।
कैट ने ई-कामर्स में 100 प्रतिशत एफडीआई का भी विरोध किया है। कैट ने दावा किया कि बिजनेस टु बिजनेस माडल में विदेशी निवेश की अनुमति है, लेकिन ई पोर्टल इन नियमनों का उल्लंघन करते हुए बिजनेस टु कंज्यूमर का काम कर रहे हैं और खुद को मार्केटप्लेस के रूप में पेश कर रहे हैं। कैट ने कहा कि मौजूदा नीति से बड़े खिलाडि़यों को बाजार पर एकाधिकार करने में मदद मिलेगी।