नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों के गन्ना किसानों और चीनी मिल मालिकों ने यहां विरोध प्रदर्शन आयोजित किया और उनकी मांग थी कि सरकार एमएमटीसी और एसटीसी जैसी सरकारी एजेंसियों को 30 लाख टन चीनी का निर्यात करने की अनुमति दे और इस प्रकार उन्हें लगभग 21,000 करोड़ रुपए के गन्ना कीमतों के बकाये को खत्म करने में मदद करे।
करीब 30 से 40 किसान और रीगा सुगर कंपनी और तिरपति सुगर्स लिमिटेड जैसी चीनी फैक्टरियों के प्रतिनिधि दो दिन के विरोध प्रदर्शन पर हैं। रीगा सुगर कंपनी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ओ पी धानुका ने कहा, दीर्घावधिक समाधान के बतौर सरकार को फैक्टरियों से लागत मूल्य पर 30 लाख टन चीनी खरीदना चाहिये और उसे एमएमटीसी और एसटीसी के जरिये निर्यात करना चाहिये। इन एजेसियों द्वारा सही गई हानि की भरपाई की जानी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि सरकार को चीनी के आयात को प्रतिबंधित करना चाहिये और उचित एवं लाभकारी मूल्य एफआरपी के आधार पर चीनी कीमतों को तय करना चाहिये ताकि चीनी फैक्टरियों को लागत वसूल हो सके और वे गन्ने के बकाये का भुगतान कर सकें।