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डिफाल्टर ग्रीस! आज चुकानी है कर्ज की पहली किश्त

नई दिल्ली: दक्षिण पूर्वी यूरोप का बड़ा देश ग्रीस, सिकंदर महान का देश यूनान, दुनिया की 51वीं बड़ी अर्थव्यवस्था, जीडीपी के लिहाज से प्रति व्यक्ति आय के मामले में दुनिया का 37वां मुल्क और दुनिया

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डिफाल्टर ग्रीस! आज चुकानी है कर्ज की पहली किश्त

नई दिल्ली: दक्षिण पूर्वी यूरोप का बड़ा देश ग्रीस, सिकंदर महान का देश यूनान, दुनिया की 51वीं बड़ी अर्थव्यवस्था, जीडीपी के लिहाज से प्रति व्यक्ति आय के मामले में दुनिया का 37वां मुल्क और दुनिया की सबसे बड़ी मर्चेंट नेवी रखने वाले यूरोपियन यूनियन का 6वां देश अब कर्ज तले कराह रहा है। अपनी क्षमता से ज्यादा कर्ज लेने के कारण बदनाम हुए ग्रीस पर करीब 11.14 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। कर्ज के वायदे के मुताबिक ग्रीस को पहली किस्त के रूप में 12 हजार करोड़ रुपए मंगलवार यानी आज ही चुकाने हैं। अगर ऐसा नहीं हुआ तो शायद ग्रीस दुनिया का ऐसा पहला मुल्क होगा जो डिफाल्टर घोषित हो जाएगा।

जाने क्या है ग्रीस संकट-
•    साल 1999 में यहां एक विनाशकारी भूकंप आया। भूकंप में देश का अधिकांश हिस्सा तबाह हो गया। इस तबाही के कारण 50,000 इमारतों को सरकारी खर्चे पर फिर से बनवाना पड़ा।
•    2004 के ओलिंपिक खेलों की मेजबानी मिलने के बाद लोगों की अच्छी आवभगत के लिए यूरो जोन से बड़ा कर्ज लिया। सरकार पर यह भी आरोप लगे कि उस दौरान मौजूदा सरकार ने बेजा पैसे खर्च किए। सात साल के दौरान 12 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च कर दिए गए।
•    साल 2009 में नई सरकार आने के बाद ग्रीस पर उसकी जीडीपी की तुलना में 113 फीसदी कर्ज था जो कि यूरो जोन में सबसे ज्यादा था।
•    ग्रीस ने साख बचाने के लिए आंकड़ों में हेरफेर की, मगर जल्द ही सच्चाई सबके सामने आ गई। ऐसे में ग्रीस पर भरोसे का संकट पैदा हुआ और इसे कर्ज देने वाले मुल्कों की तादात धीरे धीरे कम होती गई। हालात यह थे कि यहां पर ब्याज दरें 30 फीसदी के आसपास पहुंच गईं।
•    साल 2010 में यूरो जोन, यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ईसीबी) और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ग्रीस की मदद को आगे आए और उसे डिफॉल्टर होने से बचाने के लिए उसे कुछ सुधार शर्तों के साथ 10 अरब यूरो का राहत पैकेज दिया।
•    ग्रीस धीरे धीरे पटरी पर आ ही रहा था। आईएमएफ ने भी जनवरी 2015 से मार्च 2016 तक ग्रीस को 8.2 अरब यूरो का कर्ज दिया। मगर नए संसदीय चुनाव के बाद सत्ता पर काबिज हुए वामपंथी सिरिजा पार्टी के नेता ने बेलआउट की शर्तों को ठुकरा दिया जाएगा। बस यहीं से ग्रीस के बुरे दिन की शुरुआत हो गई।

ग्रीस डिफाल्टर हुआ तो-
यूरोपियन यूनियन और यूरो जोन से हो जाएगा बाहर
पुरानी करेंसी ड्रैकमा को करना पड़ेगा लागू, पर यह आसन नहीं।
हो सकता है देश में व्यापार का बहिष्कार
बंद हो जाएगा ग्रीस से आयात-निर्यात

भारत पर असर-
हालांकि ग्रीस का संकट वैश्विक संकट की तरफ इशारा कर रहा है लेकिन भारत पर इसका कोई बड़ा असर नहीं पड़ता जान पड़ रहा है। हालांकि ग्रीस संकट की आहट से सोमवार को भारतीय शेयर बाजारों में सिरहन जरूर पैदा हुई थी। सेंसेक्स ने तो 600 अंकों से ज्यादा का गोता लगा दिया था। वहीं देश के वित्त सचिव राजीव महर्षि का कहना है भारत को इस संकट से घबराने की जरूरत नहीं है। जानकारों के मुताबिक ग्रीस संकट के कारण और यूरोप में ब्याज दरें बढ़ने के कारण विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों से अपना पैसा तो निकाल सकते हैं, हालांकि सरकार भी इस स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां कर रही है।