बच्चे का सवाल क्यों 63 रुपए का है एक डॉलर'
नई दिल्ली: छोटे बच्चे मासूम और नादान होते हैं, लेकिन तमाम नादानियों के बीच देश की आबादी का बड़ा हिस्सा माने जाने वाले बच्चे अक्सर ऐसे सवाल पूछ बैठते हैं जिनके जवाब हम उसी भोलेपन
सवाल- अगर तुम्हारे पास सिर्फ 10 रुपए के ही नोट हो और तुम्हें 20 रुपए की चॉकलेट खरीदनी हो तो तुम क्या करोगे?
बच्चा- मैं दुकानदार को दो नोट दूंगा और चाकलेट खरीद लूंगा।
सवाल- अच्छा, चलो दूसरी दुकान पर जाते हैं। अगर वहां पर अच्छी चाकलेट 50 रुपए की हो तो तुम क्या करोगे?
जवाब- मैं दुकानदार को 5 नोट दे दूंगा।
सवाल- बहुत अच्छे, चलो अगली दुकान पर चलते हैं, जहां एक बढ़िया चाकलेट 500 रुपए में मिलती है और वो 100 रुपए के अलावा कोई और नोट नहीं लेता है, तो तुम क्या करोगे?
जवाब- मैं दुकानदार को 50 नोट दे दूंगा।
सवाल- ध्यान रहे कि दुकानदार सिर्फ 100 रुपए के नोट ही लेता है?
जवाब- लेकिन मैं उसे चाकलेट की पूरी कीमत दे रहा हूं।
सवाल- लेकिन वो दूसरे तंत्र में विश्वास रखता है और वो सिर्फ 100 रुपए के ही नोट देता है, लेकिन तुम्हारे पास सिर्फ 10 रुपए के नोट हैं। ऐसे में अगर आप दुकान से कुछ खरीदना चाहते हैं तो आपके नोट की क्या कीमत है?
जवाब- मुझे 100-100 के 5 नोट कहीं से लाने होंगे और उसे इसके बदले में 50 नोट देने होंगे।
सवाल- सही। अब जरा सोचो कि अगर कोई व्यक्ति दुकान के बाहर खड़ा है और वो 10 रुपए के नोट के बदले 100 रुपए देता है, तब?
जवाब- वॉव, तो मैं उसे 50 नोट देकर 100-100 के पांच नोट ले लूंगा। अब बच्चा सोचने लगता है।
सवाल- क्या तुम वाकई में चाकलेट खरीदना चाहते हो और सोचो बाहर खड़े आदमी से अगर तुम समय पर 100 का नोट न ले पाओ और अगर हर कोई उससे 100 का नोट लेना चाहता हो तो तुम क्या करोगे? क्या चाकलेट की कीमत बदल गई?
जवाब- नहीं।
सवाल- तो समस्या क्या है?
जवाब- दुकानदार सिर्फ 100 रुपए के ही नोट मांगता है।
सवाल- क्या तुम्हारे पास कम पैसा है?
जवाब- नहीं।
सवाल- क्या तुम 500 रुपए की चाकलेट के लिए 500 रुपए से ज्यादा पैसे दे देते हो?
जवाब- हां।
सवाल- क्यों? चाकलेट की कीमत नहीं बदलती।
जवाब- चाकलेट की कीमत वही रहती है, लेकिन 100 रुपए के नोट की कीमत बढ़ जाती है।
सवाल- हां ऐसा ही होता है। यह दुकान अमेरिका है और इस 100 रुपए के एक नोट को हम डॉलर मान सकते हैं। मुद्रा विनिमय का माध्यम है। इसकी कीमत लोगों की मांग के आधार पर तय होती है, चाकलेट की एक ही कीमत है, लेकिन यह अमेरिका में बिकती है, ऐसे में अगर उससे व्यापार करना चाहते हो तो आपको उसे वही मुद्रा और नोट देने होंगे जो वो चाहता है। वो सिर्फ डॉलर लेता है। आपके 10 रुपए के नोट की उसके लिए कोई वकत नहीं। इसलिए आपको ऐसे आदमी के पास जाना होगा जिसके पास डॉलर हो। जब आप डॉलर खरीदोगे तो उसकी कीमत इस आधार पर तय होगी कि बाजार में उसकी मांग कितनी है। यह बात इत्तेफाक नहीं रखती कि चाकलेट की कीमत वही रहती है। सोचो क्या होगा अगर हर कोई डॉलर की मांग करने लगे?
जवाब- मुझे डॉलर लेने के लिए ज्यादा रुपए खर्च करने होंगे (एक्सचेंज रेट)।
लब्बोलुआब- इसलिए जब भी आप 1 डॉलर का जिक्र करते हैं तो इसका मतलब 63 रुपए होता है, यानी हर कोई डॉलर खरीदना चाहता है।
