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एलआईसी की जीवन तरूण लॉन्च फायदे पर अभी से उठने लगे सवाल

नई दिल्ली: बच्चों की शैक्षणिक आवश्यकताओं के लिहाज से एलआईसी ने जीवन तरूण नाम से नई स्कीम निकाली है। जीवन तरूण बाजार में उतरने के साथ ही विशेषज्ञों के सवालों के घेरे में आ गई

LIC की नई पॉलिसी जीवन...- India TV Hindi
LIC की नई पॉलिसी जीवन तरुण, निवेश के लिए कितनी बेहतर?

नई दिल्ली: बच्चों की शैक्षणिक आवश्यकताओं के लिहाज से एलआईसी ने जीवन तरूण नाम से नई स्कीम निकाली है। जीवन तरूण बाजार में उतरने के साथ ही विशेषज्ञों के सवालों के घेरे में आ गई है। हमने अपनी स्टोरी में जीवन तरूण के बारे में बताने के साथ साथ यह भी समझाने की कोशिश की है कि आपको इस पालिसी का लाभ लेना चाहिए या नहीं।

क्या है पालिसी-

कम अवधि की मनी बैक प्लान वाली यह पॉलिसी मेच्योरिटी बेनिफिट के साथ साथ डेथ बेनिफिट और सर्वाइवल बेनिफिट की सुविधा भी देती है। एलआईसी की इस पालिसी में मेच्योरिटी का पैसा बच्चे के 25 साल के होने पर मिलता है। इस योजना का लाभ लेने के लिए कम से कम पांच साल तक लगातार इसके प्रीमियम का भुगतान करना होगा।

जीवन तरूण के फीचर-

  • बीमाधारक की न्यूनतम आयु 90 दिन और अधिकतम आयु 12 साल होनी चाहिए।
  • बीमा प्रस्तावक की उम्र भी 18 साल से 55 के बीच होनी चाहिए।
  • यह पॉलिसी धारक के 25 साल का होने तक ही चलेगी। धारक के 25 साल का हो जाने के बाद यह मेच्योर हो जाएगी।
  • प्रीमियम भुगतान की अवधि 20 साल होगी।
  • इस योजना में आपको न्यूनमत भुगतान 75,000 रुपए होगा वहीं अधिकतम भुगतान की कोई तय सीमा नहीं है।

क्या है जीवन तरूण पालिसी का लाभ-

डेथ बेनिफिट-  

अगर जोखिम की शुरूआत में ही धारक की मौत हो जाती है तो उसे उसके प्रीमियम की भुगतान राशि के बराबर राशि लौटा दी जाएगी।

अगर तय जोखिम की शुरूआत होने के बाद प्रस्तावक की मौत हो जाती है तो नामिनी को पूरा डेथ बेनिफिट की राशि मिलेगी। इस राशि में मृत्यु के समय बीमे की कुल राशि(सम एस्योर्ड) के साथ साथ बोनस भी मिलेगा।

मेच्योरिटी बेनिफिट-

अगर पालिसी के प्रीमियम का भुगतान तय समय तक जारी रहता है तो निर्धारित राशि का भुगतान मेच्योरिटी के बाद कर दिया जाता है।

जानिए जीवन तरूण पर क्या कहते हैं बाजार एक्सपर्ट-

  • एस्पर्ट मानते हैं कि आमतौर पर बीमा परिवार के मुखिया ही कराते हैं क्योंकि उनपर ही उनका पूरा परिवार (बीबी और बच्चे) निर्भर होते हैं। ऐसे में बच्चे का बीमा कराना जायज नहीं है। अगर बच्चा बालिग नहीं है तो हमें उसका बीमा कराने के बारे में सोचना भी नहीं चाहिए।
  • एक्सपर्ट कहते हैं कि भारत जैसे देश में उच्च शिक्षा की सामान्य उम्र 18 साल है जबकि इस पालिसी के तहत 20 साल की उम्र तक प्रीमियम भुगतान करना ही होगा। इसका मतलब यह है कि यह बच्चे की उच्च शिक्षा के लिए लाभकारी नहीं है।
  • वहीं दूसरी तरफ एक्सपर्ट यह भी मानते हैं कि इस तरह की पालिसी आमतौर पर लोगों को उनके बच्चे की शादी के निवेश के बहाने आकर्षित करती हैं, लेकिन सभी जानते हैं कि सभी मनी बैक पालिसियों में 5 से 7 फीसदी का ही ब्याज मिलता है। तो अगर महंगाई के आंकड़ों पर ही तौले तो भी यह पालिसी मुफीद नहीं जान पड़ती है। शिक्षा के लिहाज से ही देखें तो देश में महंगाई दर तेजी से भाग रही है और यह पालिसी न्यूनतम रिटर्न ही दे रही है।

कुल मिलाकर लब्बोलुआब यह है कि अगर कोई अपने बच्चों की शिक्षा और अन्य कामों के लिए निवेश करना चाहता है तो उसे ऐसी पालिसी के बजाए एनएससी में निवेश और बैंक में फिक्सड डिपाजिट जैसी बेहतर योजनाओं का चयन करना चाहिए।