नई दिल्ली: सरकार और रिजर्व बैंक के बीच प्रस्तावित मौद्रिक नीति समिति और लोक रिण प्रबंधन एजेंसी के ढांचे के बारे में सहमति बन गई है। वित्त सचिव राजीव महर्षि ने यह बात कही। महर्षि ने कहा, मौद्रिक नीति समिति (MPC) और लोकर रिण प्रबंधन एजेंसी (PDMA) एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। इस मामले में रिजर्व बैंक (RBI) के साथ सहमति है। मुझे उम्मीद है कि यह (संशोधन) दिसंबर में शीतकालीन सत्र में संसद में आ सकते हैं।
MPC और PDMA की स्थापना के लिए रिजर्व बैंक कानून में संशोधन करना होगा। यह MPC, PDMA के साथ ही होगा। यह कुछ दिन में हो सकता है। महर्षि ने हालांकि, इस मामले में MPC में सदस्यों की संख्या और रिजर्व बैंक गवर्नर के मताधिकार के बारे में ब्यौरा देने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि इस बारे में विधेयक जब संसद में पेश होगा तब इसका ब्यौरा उपलब्ध होगा। सरकार ब्याज दरों को तय करने के बारे में फैसला लेने के लिए एक समिति गठित करने का प्रयास करती रही है। इस समिति में वित्त मंत्रालय और रिजर्व बेंक के प्रतिनिधि होंगे। इससे पहले भारतीय वित्तीय संहिता ने MPC का जो मसौदा जारी किया था उसमें समिति में सात सदस्य रखने का प्रस्ताव किया गया।
इनमें चार सरकार के प्रतिनिधि होंगे और शेष रिजर्व बैंक के। इसमें रिजर्व बैंक गवर्नर की वीटो शक्ति को भी समाप्त करने का सुझाव दिया गया था।