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20 महीनों में 508 से अधिक माओवादी हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में आए, मार्च 2026 तक नक्सलवाद मुक्त होगा छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में नक्सली मुख्यधारा की ओर लौट रहे हैं। सुरक्षा बलों के डर की वजह से नक्सली अब हथियार छोड़ने को मजबूर हैं। साथ ही सरकार उन्हें पुनर्वास नीति के तहत सरेंडर करने वाले नक्सलियों को 50000 रुपये की तत्काल सहायता भी दे रही है।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
Image Source : PTI सांकेतिक तस्वीर

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में रविवार को 37 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें से 27 पर कुल 65 लाख रुपये का इनाम घोषित था। 20 महीनों में 508 से अधिक नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में आ गए हैं। 

CRPF के सामने किया सरेंडर

दंतेवाड़ा के पुलिस अधीक्षक (SP) गौरव राय ने बताया कि 12 महिलाओं समेत इन नक्सलियों ने 'पूना मारगेम' (पुनर्वास से सामाजिक एकीकरण तक) पहल के तहत पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया। 

बस्तर क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने की पहल

उन्होंने कहा कि बस्तर रेंज के पुलिस द्वारा शुरू की गई यह पहल बस्तर क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए एक परिवर्तनकारी अभियान के रूप में उभर रही है। आत्मसमर्पण करने वालों में कुमाली उर्फ ​​अनीता मंडावी, गीता उर्फ ​​लक्ष्मी मड़कम, रंजन उर्फ ​​सोमा मंडावी और भीमा उर्फ ​​जहाज कलमू शामिल हैं। 

कृषि भूमि समेत अन्य सुविधाएं भी दी जाएंगी

सीआरपीएफ के अधिकारी ने कहा कि इन सभी पर 8-8 लाख रुपये का इनाम था। उन्होंने कहा कि सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को 50,000 रुपये की तत्काल सहायता के साथ-साथ कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण, कृषि भूमि समेत अन्य सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। 

 20 महीनों में 508 से अधिक माओवादी हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में आए

केंद्र और राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीतियों से प्रेरित होकर दंतेवाड़ा जिले में पिछले 20 महीनों में 508 से अधिक माओवादी हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं, जिनमें से 165 पर इनाम घोषित है। 

मार्च 2026 तक नक्सलवाद मुक्त होगा छत्तीसगढ़

राय ने कहा कि वरिष्ठ नेताओं से लेकर अपने आधार क्षेत्रों में सक्रिय कार्यकर्ताओं तक, बड़ी संख्या में माओवादी प्रतिबंधित संगठन को छोड़ चुके हैं। पुलिस के अनुसार, पिछले 23 महीनों में छत्तीसगढ़ में 2,200 से ज़्यादा नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें शीर्ष नक्सली भी शामिल हैं। केंद्र ने मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद को खत्म करने का संकल्प लिया है। (भाषा के इनपुट के साथ)