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कैंसर से लड़ते हुए 38 की उम्र में पास की UPSC की परीक्षा, युवाओं के लिए पेश की मिसाल, कहानी जानकर सैल्यूट करेंगे

छत्तीसगढ़ के महासमुंद में एक शख्स ने 38 साल की उम्र में यूपीएससी की परीक्षा पास की। उन्होंने कैंसर से लड़ते हुए एग्जाम की तैयारी की और यूपीएससी में 946वीं रैंक हासिल की।

Sanjay Dahriya- India TV Hindi
Image Source : FACEBOOK/RAIPURDIST कलेक्टर डॉ गौरव सिंह ने संजय को बधाई दी

महासमुंद: कहते हैं कि अगर किसी चीज को शिद्दत के साथ चाहो तो पूरी कायनात उसे तुमसे मिलाने में लग जाती है। छत्तीसगढ़ के महासमुंद के संजय डहरिया की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने कैंसर जैसी भयानक बीमारी से लड़ते हुए 38 साल की उम्र में UPSC की परीक्षा पास की है। उनकी UPSC में 946वीं रैंक आई है।

संजय डहरिया ने यूपीएससी में ये सफलता अपने तीसरे प्रयास में पाई है। वह मूल रूप से महासमुंद जिले के बेलटुकरी गांव के रहने वाले हैं। वह अनुसूचित जाति वर्ग से आते हैं। उनके पिता किसान हैं और माता गृहिणी हैं। संजय अपने 3 भाईयों और एक बहन में सबसे छोटे हैं।

कहां से की पढ़ाई?

संजय ने शुरुआती पढ़ाई गांव में ही की। वह सरकारी स्कूल में पढ़े। इसके बाद उन्होंने जवाहर नवोदय विद्यालय, माना (रायपुर) में 12वीं तक की पढ़ाई की। फिर उन्होंने महासमुंद के वल्लभाचार्य शासकीय महाविद्यालय से अर्थशास्त्र में बीए किया और कॉम्पटीशन की तैयारी शुरू कर दी।

संजय ने SBI की परीक्षा भी पास कर रखी है और 2009 से 2011 तक पश्चिम बंगाल की एक शाखा में सेवाएं भी दी हैं। इसके अलावा उन्होंने रायपुर में आईडीबीआई बैंक में भी काम किया है। उन्होंने महासमुंद डाकघर के बैंकिंग शाखा में भी सेवाएं दीं। जहां लोगों को एक नौकरी के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, वहीं संजय ने अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर कई नौकरियां पाईं और आगे बढ़ने की इच्छा से इस्तीफा देते गए।

साल 2022 में संजय ने यूपीएससी की परीक्षा में बैठना शुरू किया। शुरुआती 2 कोशिशों में वह सफल नहीं हुए लेकिन इस बार अपनी तीसरी कोशिश में वह पास हुए और उन्होंने यूपीएससी में 946वीं रैंक हासिल की।

कैंसर से लड़ी जंग

संजय को 2012 में अपनी कैंसर की बीमारी का पता लगा। उन्हें लार ग्रंथियों में कैंसर है। इसके बाद उन्होंने इस बीमारी का इलाज करवाने के लिए मुंबई में इलाज भी करवाया। उन्होंने अपने रोग से हार नहीं मानी और परीक्षाओं की तैयारियां और समय-समय पर नौकरियां करते रहे। 

संजय ने अपनी सफलता पर क्या कहा?

संजय ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार, दोस्तों और गुरुजनों को दिया है और कहा है कि वह इस सर्विस के जरिए देशसेवा करना चाहते हैं। संजय की कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा है। कई बार कुछ युवा थोड़े से संघर्ष में परेशान हो जाते हैं और अपने लक्ष्य को भूल जाते हैं, ऐसे में संजय की कहानी उन्हें मजबूती देगी।