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चिनाब ब्रिज में लगा है भिलाई से गया हजारों टन स्टील, जानें किस-किस चीज की हुई थी सप्लाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को जम्मू कश्मीर में दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे ब्रिज 'चिनाब ब्रिज' का उद्घाटन किया। क्या आपको मालूम है कि दुनिया के इस सबसे ऊंच रेल ब्रिज का छत्तीसगढ़ से गहरा नाता है। चिनाब ब्रिज के निर्माण के लिए छत्तीसगढ़ में हजारों टन का स्टील तैयार किया गया था।

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Image Source : फाइल फोटो चिनाब नदी पर बने इस सबसे ऊंचे रेलवे ब्रिज पर हजारों टन स्टील का इस्तेमाल किया गया है।

दुर्ग: जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर निर्मित दुनिया के सबसे ऊंचे रेल पुल का छत्तीसगढ़ के भिलाई इस्पात संयंत्र से गहरा नाता है। इस पुल के निर्माण के लिए स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने 16 हजार टन इस्पात की आपूर्ति की, जिसमें से 12 हजार टन भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) में तैयार किया गया। बीएसपी के अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कश्मीर घाटी के लिए पहली रेल सेवा को हरी झंडी दिखाई और चिनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल तथा भारत के पहले ‘केबल आधारित’ अंजी खड्ड पुल सहित कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया। 

भिलाई से किस-किस चीज की हुई सप्लाई?

दुर्ग जिले में स्थित भिलाई स्टील प्लांट के अधिकारियों ने बताया कि सेल के विभिन्न इस्पात संयंत्रों, जिसमें भिलाई भी शामिल है, ने इस पुल के लिए 16 हजार टन स्टील की सप्लाई की। इसमें प्लेट्स, टीएमटी बार और स्ट्रक्चरल्स शामिल हैं। अधिकारियों ने कहा कि इस्पात किसी भी निर्माण और औद्योगिक कार्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण सामग्री में से एक है। जानकारी के अनुसार, इस पुल के निर्माण में लगभग 29 हजार मीट्रिक टन इस्पात, 10 लाख घन मीटर मिट्टी, 66 हजार घन मीटर से अधिक कंक्रीट और 84 किलोमीटर ‘रॉक बोल्ट’ (जमीन को स्थिर करने के लिए इस्पात के बोल्ट) तथा केबल एंकर का उपयोग हुआ।

इतना खास क्यों है चिनाब नदी पर बना पुल?

अधिकारियों ने बताया कि 1.3 किलोमीटर लंबा यह पुल चिनाब नदी के तल से 359 मीटर की ऊंचाई पर बना है, जो पेरिस के एफिल टॉवर से 35 मीटर अधिक ऊंचा है। यह इंजीनियरिंग का एक अनूठा नमूना है, जो 266 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवा और भूकंप के तेज झटकों को सहन करने में सक्षम है। यह पुल उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना (यूएसबीआरएल) के तहत कटरा से बनिहाल तक 111 किलोमीटर लंबे घुमावदार खंड का हिस्सा है। यह क्षेत्र में आवागमन को आसान बनाएगा।

और कहां-कहां से की गई स्टील की सप्लाई?

अधिकारियों ने बताया कि सेल के इस्पात संयंत्रों ने इस पुल के लिए 6690 टन टीएमटी उत्पाद, 1793 टन स्ट्रक्चरल स्टील और 7511 टन स्टील प्लेट्स, हॉट स्ट्रिप मिल प्रोडक्ट और चेकर्ड प्लेट्स सहित कुल 16 हजार टन इस्पात की आपूर्ति की। भिलाई इस्पात संयंत्र ने इसमें 5922 टन टीएमटी स्टील, 6454 टन प्लेट्स और 56 टन स्ट्रक्चरल स्टील सहित कुल 12,432 टन इस्पात दिया। उन्होंने बताया कि सेल के पश्चिम बंगाल के बर्नपुर स्थित इस्को इस्पात संयंत्र, दुर्गापुर इस्पात संयंत्र, ओडिशा के राउरकेला इस्पात संयंत्र और झारखंड के बोकारो स्टील लिमिटेड ने भी इस पुल के लिए स्टील की सप्लाई की गई।

भिलाई से गया स्टील कई प्रोजेक्ट में लगा

अधिकारियों ने कहा कि सेल ने पहले भी कई राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं, जैसे बांध, पुल, सुरंग, फ्लाईओवर, एक्सप्रेसवे, ऊर्जा क्षेत्र और रक्षा क्षेत्र के लिए इस्पात की आपूर्ति की है। भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा उत्पादित इस्पात का उपयोग बांद्रा-वर्ली सी-लिंक, मुंबई में अटल सेतु, अरुणाचल प्रदेश में सेला सुरंग और हिमाचल प्रदेश में अटल सुरंग के निर्माण में हुआ है। इसके अलावा, युद्धपोतों और आईएनएस विक्रांत के निर्माण में भी भिलाई के इस्पात का उपयोग हुआ। बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए बीएसपी ने बड़ी मात्रा में टीएमटी बार्स की आपूर्ति की है। साथ ही, नई दिल्ली में सेंट्रल विस्टा परियोजना के लिए भी बीएसपी ने टीएमटी उत्पाद दिए हैं। (इनपुट- पीटीआई)

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