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बेकार कपड़ों से खिलौने बना रहीं आदिवासी महिलाएं, घर बैठे कमाई का खुला नया रास्ता

छत्तीसगढ़ में PVTG समुदाय की महिलाओं को बेकार कपड़ों से सॉफ्ट टॉय बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है। प्रशिक्षण के बाद उन्हें सिलाई मशीन, कच्चा माल और ऑर्डर मिलेंगे, जिससे वे घर बैठे हुनर के जरिए अतिरिक्त कमाई कर सकेंगी।

PVTG Women Empowerment, Chhattisgarh Tribal Women- India TV Hindi
Image Source : ANI छत्तीसगढ़ में महिलाओं को बेकार कपड़ों से सॉफ्ट टॉय बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है।

Highlights

  • PVTG महिलाओं को बेकार कपड़ों से सॉफ्ट टॉय बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है।
  • ट्रेनिंग के बाद महिलाओं के घर पर सिलाई मशीन लगाकर ऑर्डर दिए जाएंगे।
  • ‘कौशल’ ब्रांड के तहत उत्पाद ऑनलाइन और ऑफलाइन बाजार में बेचे जाएंगे।

रायपुर: छत्तीसगढ़ में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह यानी कि PVTG की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की पहल की जा रही है। ग्रामोद्योग विभाग और हैंडलूम फेडरेशन इन महिलाओं को बेकार कपड़ों से सॉफ्ट टॉय बनाने की ट्रेनिंग दे रहे हैं। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेशी खिलौनों को विकसित और बढ़ावा देने के आह्वान से जुड़ी है। तैयार उत्पादों को ‘कौशल’ ब्रांड के तहत ऑनलाइन और ऑफलाइन प्लेटफॉर्म पर बेचा जा रहा है।

ट्रेनिंग के बाद घर पर मिलेगी सिलाई मशीन

ग्रामोद्योग सचिव राजेश राणा ने बताया कि महिलाओं को सिलाई और खिलौने बनाने की ट्रेनिंग देने के बाद उन्हें कच्चा माल उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बाद उनके घर पर सिलाई मशीन लगाई जाएगी। बाजार से ऑर्डर मिलने पर ये ऑर्डर सीधे महिलाओं को दिए जाएंगे। इससे महिलाएं घर से ही काम कर सकेंगी और उनकी आय बढ़ाने का एक अतिरिक्त जरिया तैयार होगा।

पहले बैच में 30 महिलाओं को मिली ट्रेनिंग

राजेश राणा के मुताबिक, पहले बैच में PVTG समुदाय की 30 महिलाओं को ट्रेनिंग दी गई है। अब हर महीने 30 महिलाओं को प्रशिक्षण देने की योजना है। इसका मकसद महिलाओं को ऐसा काम उपलब्ध कराना है, जिसे वे घर से कर सकें। इससे उन्हें गांव में रहकर ही अतिरिक्त आमदनी का मौका मिलेगा और वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान दे सकेंगी।

Image Source : ANIमहिलाएं बेकार कपड़ों से अलग-अलग चीजें बना रही हैं।

रायपुर और जगदलपुर से शुरू हुआ प्रशिक्षण

फिलहाल महिलाओं का प्रशिक्षण दो जगहों पर शुरू किया गया है। इनमें रायपुर और जगदलपुर शामिल हैं। राजेश राणा ने बताया कि आने वाले समय में यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सरगुजा, बिलासपुर और रायगढ़ में भी शुरू किया जाएगा। यानी आने वाले दिनों में और PVTG महिलाओं को इस योजना से जोड़ने की तैयारी है।

सुकमा की महिलाओं ने 15 दिन में सीखा हुनर

सुकमा जिले से आई लाभार्थी मार्कम संगीता ने बताया कि उन्होंने 15 दिन के प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा,

'हम सुकमा जिले से यहां आए और 15 दिन के प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इसमें हमने सिलाई मशीन चलाना, चरखा इस्तेमाल करना और सॉफ्ट टॉय बनाना सीखा।'

पहले घर पर रहती थीं, अब नया काम सीखा

संगीता ने बताया कि ट्रेनिंग में शामिल होने से पहले वे घर पर रहती थीं और ज्यादा कुछ नहीं कर पाती थीं। उन्होंने कहा,

'ट्रेनिंग लेने के बाद हमने बहुत कुछ सीखा है।'

सरकारी पहल के जरिए उन्हें सिलाई मशीन चलाने और बेकार कपड़ों से अलग-अलग चीजें बनाने का मौका मिला। इनमें पक्षी, हेयर क्लिप और कई तरह के सॉफ्ट टॉय शामिल हैं।

करना पड़ता था मजदूरी का काम

संगीता ने बताया कि पहले पढ़ी-लिखी होने के बावजूद उन्हें गांव में मजदूरी का काम करना पड़ता था। उन्होंने कहा कि इस ट्रेनिंग से उन्हें एक नया हुनर सीखने का मौका मिला है। अब वे सिलाई मशीन चला सकती हैं और बेकार कपड़ों का इस्तेमाल करके उपयोगी और आकर्षक सामान तैयार कर सकती हैं। सरकारी योजना के जरिए उन्हें घर से काम और कमाई का अवसर मिलने की उम्मीद है।

गांव में काम नहीं, ट्रेनिंग से मिली नई उम्मीद

कोरबा जिले की लाभार्थी गायत्री कुमारी कोरवा ने भी प्रशिक्षण को अपने लिए उपयोगी बताया। उन्होंने कहा,

'हमारे गांव में कोई काम नहीं है और ट्रेनिंग में शामिल होने के बाद हमने बहुत सी चीजें सीखी हैं।'

उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को हाथी, पक्षी, मछली, टेडी बियर, हेयर क्लिप और दूसरी चीजों के सॉफ्ट टॉय बनाने के तरीके सिखाए गए।

बेकार कपड़े बनेंगे कमाई का जरिया

इस पहल में हैंडलूम एसोसिएशन से निकलने वाले बेकार कपड़ों का इस्तेमाल सॉफ्ट टॉय और दूसरी चीजें बनाने में किया जाएगा। महिलाओं को पहले प्रशिक्षण मिलेगा, फिर कच्चा माल और घर पर सिलाई मशीन उपलब्ध कराई जाएगी। बाजार से मिलने वाले ऑर्डर सीधे उन्हें दिए जाएंगे। इस तरह बेकार कपड़े उपयोगी उत्पादों में बदलेंगे और PVTG महिलाओं के लिए घर बैठे कमाई का जरिया तैयार होगा। बता दें कि छत्तीसगढ़ से ही आई एक और अच्छी खबर में कभी नक्सलियों के ट्रेनिंग ग्राउंड रहे कांकेर में बच्चों को सुरक्षाबलों में भर्ती के लिए फ्री ट्रेनिंग दिए जाने की खबर सामने आई थी। (ANI से इनपुट्स के साथ)

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