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फर्जी डॉक्टर नरेंद्र यादव ने की थी पूर्व विधानसभा स्पीकर की सर्जरी, जल्द ही हो गई थी मौत, 19 साल बाद केस दर्ज

आरोपी डॉक्टर ने 19 साल पहले पूर्व विधानसभा स्पीकर की सर्जरी की थी। नरेंद्र यादव ने एक प्राइवेट अस्पताल में यह सर्जरी की थी। सर्जरी के बाद विधानसभा अध्यक्ष की मौत हो गई थी।

Narendra Yadav- India TV Hindi
Image Source : X फर्जी डॉक्टर नरेंद्र यादव

फर्जी हार्ट सर्जन नरेंद्र यादव की गिरफ्तारी के बाद लगातार हैरान करने वाले खुलासे हो रहे हैं। नरेंद्र यादव ने 19 साल पहले छत्तीसगढ़ के पूर्व विधानसभा स्पीकर राजेंद्र प्रसाद शुक्ला की सर्जरी की थी और सर्जरी के बाद उनकी मौत हो गई थी। अब आरोपी डॉक्टर के खिलाफ बिलासपुर में गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है। एक अधिकारी ने रविवार को बताया कि 'फर्जी' हृदय रोग विशेषज्ञ नरेंद्र यादव उर्फ ​​नरेंद्र जॉन कैम और बिलासपुर के एक निजी अस्पताल पर शनिवार को 19 साल पहले पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ला की मौत के मामले में गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस अधिकारी के अनुसार यादव और निजी अस्पताल के खिलाफ गैर इरादतन हत्या (धारा 304), धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) रजनेश सिंह ने बताया कि यादव को मध्य प्रदेश के दमोह स्थित एक अस्पताल में गलत सर्जरी के बाद सात मरीजों की मौत के मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने यहां निजी अस्पताल में शुक्ला का ऑपरेशन किया था, जिसके बाद पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की मौत हो गई थी।

2006 में हुई थी मौत

कोटा विधानसभा क्षेत्र से तत्कालीन कांग्रेस विधायक शुक्ला का 2006 में बिलासपुर के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया था। वे 2000 से 2003 तक छत्तीसगढ़ विधानसभा के पहले अध्यक्ष रहे थे। पूर्व स्पीकर के बेटे प्रदीप शुक्ला ने हाल ही में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि जब उनके पिता इस निजी अस्पताल में भर्ती थे, तब यादव उस अस्पताल में काम करते थे। शिकायत में कहा गया है, "यादव ने मेरे पिता की हार्ट सर्जरी की थी और उन्हें 18 दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा गया था। इसके बाद 20 अगस्त 2006 को उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था। अस्पताल प्रबंधन ने मेरे पिता के इलाज के लिए राज्य सरकार से 20 लाख रुपये लिए थे।"

प्रदीप शुक्ला ने लगाए गंभीर आरोप

प्रदीप शुक्ला ने कहा कि उन्हें हाल ही में मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से यादव और दमोह अस्पताल में हुई मौतों के बारे में पता चला। एसएसपी सिंह ने बताया कि पुलिस ने पाया है कि यादव की डिग्री फर्जी है तथा भारतीय चिकित्सा परिषद/छत्तीसगढ़ चिकित्सा परिषद में उसके पंजीकरण का दस्तावेज अभी तक नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रबंधन ने बिना उचित जांच के यादव को हृदय रोग विशेषज्ञ के रूप में नियुक्त करके पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शुक्ला के साथ-साथ कई अन्य हृदय रोगियों के जीवन के साथ खिलवाड़ किया।

दमोह में 7 मौतों के बाद हुई गिरफ्तारी

यादव को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) द्वारा शिकायत मिलने के बाद गिरफ्तार किया गया था, जिसमें दावा किया गया था कि मिशन अस्पताल, दमोह में सात लोगों की मौत हो गई थी, जहां उन्होंने हृदय रोगों के इलाज के नाम पर मरीजों का ऑपरेशन किया था। इंदौर स्थित एक रोजगार परामर्श फर्म के निदेशक ने पिछले सप्ताह कहा था कि यादव ने 2020 से 2024 के बीच नौकरी के लिए तीन बार अपना बायोडाटा भेजा था और दावा किया था कि उन्होंने हजारों मरीजों का ऑपरेशन किया है।

नरेंद्र यादव बोले- मेरी सारी डिग्रियां असली

2024 में अपनी फर्म को भेजे गए 9 पन्नों के बायोडाटा में यादव ने खुद को वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ बताया था और अपना स्थायी पता ब्रिटेन में बर्मिंघम बताया था। बायोडाटा में उसने यह भी बताया था कि वह हजारों हृदय रोगियों के ऑपरेशन में शामिल रहा है, जिसमें 18,740 "कोरोनरी एंजियोग्राफी" और 14,236 "कोरोनरी एंजियोप्लास्टी" शामिल हैं, निदेशक ने कहा। आरोपी नरेंद्र यादव ने खुद को एक "बड़ी साजिश" का शिकार बताया है और दावा किया है कि उनकी डिग्रियां असली हैं।