बलरामपुर: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में कभी नक्सली संगठन से जुड़े रहे सीताराम सोनवानी अब परिवार के साथ नई जिंदगी शुरू कर चुके हैं। साल 2021 में नक्सल संगठन छोड़कर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने वाले सीताराम को सरकारी पुनर्वास योजना के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना का पक्का घर मिला है। अब उनका परिवार इसी घर में रह रहा है। सीताराम ने बताया कि वह 1998 से 2005 तक नक्सली संगठन से जुड़े रहे और इस दौरान नक्सली कमांडर की भूमिका में थे। संगठन छोड़ने के बाद वह अपनी पत्नी विराजो के साथ असम चले गए थे।
पत्नी ने नक्सल संगठन छोड़ने के लिए किया प्रेरित
सीताराम ने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान उन्हें अपने घर और परिवार की याद आने लगी। इसी दौरान उन्हें सरकार की नक्सल पुनर्वास योजना के बारे में जानकारी मिली और उन्होंने वापस लौटकर मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया। सीताराम ने बताया,
'मैं पहले नक्सली कमांडर था और 1998 से 2005 तक नक्सली संगठन से जुड़ा रहा। इसके बाद मेरी पत्नी विराजो ने मुझे नक्सलियों को छोड़ने के लिए समझाया। उनकी वजह से मैंने नक्सल संगठन छोड़ दिया और इसके बाद हम असम जाकर रहने लगे।'
सीताराम ने बताया कि उन्होंने खबरों में देखा कि सरकार ने नक्सलियों के आत्मसमर्पण और पुनर्वास के लिए योजना शुरू की है और आत्मसमर्पण करने वालों को सरकार की ओर से कई तरह की मदद दी जा रही है।
2021 में किया आत्मसमर्पण, 14 महीने जेल में रहे
सीताराम ने बताया कि उन्होंने 26 फरवरी 2021 को बलरामपुर जिले में आत्मसमर्पण किया था। उस समय रामकिशन साहू का कार्यकाल था। आत्मसमर्पण के बाद उन्हें जेल भेजा गया, जहां वह करीब 14 महीने रहे। जेल से बाहर आने के बाद जब वह परिवार के पास लौटे तो सरकार की पुनर्वास नीति के तहत उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का घर मिला। अब यह घर बनकर पूरी तरह तैयार हो चुका है और परिवार को स्थायी ठिकाना मिल गया है।
असम से लौटे तो कच्चे घर में रहते थे सीताराम
सीताराम की पत्नी विराजो ने भी परिवार की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि शादी से पहले उन्हें सीताराम के नक्सली होने की जानकारी नहीं थी। वह उन्हें सिर्फ नाम से जानती थीं। बाद में उन्होंने सीताराम के नाम एक चिट्ठी लिखी और इसी के बाद दोनों की मुलाकात हुई। विराजो ने बताया कि उस समय वह 10वीं कक्षा में पढ़ रही थीं, लेकिन गांव छोड़ने के कारण अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सकीं। असम से वापस लौटने के बाद परिवार कुछ समय तक कच्चे मकान में रहा। उन्होंने कहा,
'वहां से आने के बाद हम कच्चे घर में रह रहे थे। अब विष्णु देव साय जी ने हमें पक्का घर दिया है और हम उसमें रह रहे हैं। अब हम अच्छी जिंदगी जी रहे हैं।'
विराजो ने परिवार को मदद देने के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और राज्य के गृह मंत्री का धन्यवाद किया।
सीताराम के बेटे और पत्नी की पढ़ाई में भी मिली मदद
सीताराम ने राज्य सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पुनर्वास के तहत मिली मदद के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा,
'अब घर भी पूरा हो गया है। इसके लिए मैं विष्णु देव साहब जी और गृह मंत्री का धन्यवाद करता हूं। मैं प्रधानमंत्री मोदी जी का भी धन्यवाद करता हूं।'
सीताराम ने बलरामपुर के पूर्व पुलिस अधीक्षक लाल उमेद सिंह की मदद को भी याद किया। सीताराम के मुताबिक, लाल उमेद सिंह ने उनके बेटे की पढ़ाई में मदद की। उन्होंने उनकी पत्नी को 10वीं कक्षा पास करने में भी सहयोग दिया।
बलरामपुर में 27 घर मंजूर, 18 बनकर तैयार
बलरामपुर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने बताया कि प्रशासन ने नक्सल प्रभावित और नक्सल हिंसा से प्रभावित उन परिवारों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए विशेष पहल की है, जिन्होंने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि बलरामपुर जिले में इस विशेष योजना के तहत कुल 27 घर मंजूर किए गए हैं। इनमें से 18 घर बनकर तैयार हो चुके हैं, जबकि 9 घरों का निर्माण अभी जारी है। इन घरों को भी जल्द पूरा करने की कोशिश की जा रही है।
जंगल की जमीन का पट्टा मिलने की भी उम्मीद
सीताराम ने बताया कि उन्हें जंगल की जमीन का पट्टा मिलने की संभावना के बारे में भी जानकारी दी गई है। उन्होंने सरकार पर भरोसा जताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही उन्हें यह पट्टा भी मिल जाएगा। उन्होंने कहा,
'मुझे सरकार पर भरोसा है कि वह पट्टा भी देगी।'
सरकार की इस पुनर्वास पहल का मकसद आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों और नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों को दोबारा सामान्य जीवन से जोड़ना है। इसके तहत ऐसे परिवारों को घर और दूसरी सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की कोशिश की जा रही है। (ANI से इनपुट्स के साथ)
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